पारा चढ़ने से बढ़ी गरमी, पाइप से पानी पीता पक्षी।
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गोवर्धन (मथुरा)। भीषण गर्मी में गिरिराज जी की परिक्रमा में पशु-पक्षी एवं आमजन पानी को तरस रहे हैं। लोग सूखी पड़ी टंकियों से वापस लौट रहे हैं। गिरिराज जी की तलहटी में विचरण कर रही गाय, बंदर एवं पक्षियों को गर्मी में पानी के बिना रहना मुश्किल हो रहा है।
आबादी क्षेत्र में ही पानी मिल रहा है। धर्मार्थ प्याऊ भी बंद हो गई हैं। गिरिराज जी की परिक्रमा के आन्यौर, पूंछरी व जतीपुरा से गोवर्धन तक दर्जनों प्याऊ बंद हैं। परिक्रमा करने आए रोहताश का कहना है कि प्रशासन ने परिक्रमा मार्ग में पानी की कोई व्यवस्था नहीं की है। गिरिराज जी की परिक्रमा में पेड़ों की छांव के नीचे बैठने की व्यवस्था है, लेकिन पानी न होने से रुक नहीं पाते हैं। सरकारी हैंडपंप भी खराब हैं।
पानी के बढ़ते व्यवसायीकरण ने बदली लोगों की भावनाएं
किसी समय जल की सेवा सबसे बड़ा पुण्य माना जाता था, लेकिन पानी के बढ़ते व्यवसायीकरण ने लोगों की भावनाएं बदल दी हैं। गिरिराज जी की परिक्रमा में गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं बनी हैं। इनमें टैंकरों द्वारा पानी बिक्री किया जा रहा है। गिरिराज जी की परिक्रमा में 250 से 300 रुपये में पानी का टैंकर बेचा जा रहा है। आरओ पानी की बोतल 20 रुपये में मिल रही है। वहीं, गोवर्धन में दर्जनों स्वयंसेवी संस्थाएं चल रही हैं, वे सिर्फ कागजों में ही काम कर रही हैं। गर्मी में पानी की उपलब्धता पर लोगों का कहना है कि सब स्वार्थ में लगे हैं। किसी को सेवा की चिंता नहीं हैं।
यहां है पानी की दरकार
गोवर्धन परिक्रमा में दानघाटी से आन्यौर तीन किमी तक इक्का-दुक्का ही प्याऊ चल रही हैं। आन्यौर से पूंछरी, जतीपुरा, गोवर्धन व राधाकुंड आदि में 21 किमी परिक्रमा मार्ग में कोई व्यवस्था नहीं है।