फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला अस्पताल में सर्जन नहीं, प्रसूताओं के आपरेशन बंद

विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद। कहने को सौ शैया महिला अस्पताल है। कुछ दिन बाद यह मेडिकल कालेज का हिस्सा बन जाएगा। लेकिन सुविधाओं के नाम पर व्यवस्थाएं राम भरोसे हैं। यहां पर आपरेशन के लिए एक भी चिकित्सक नहीं है। प्रसूता को आगरा रेफर किया जाता है या फिर तीमारदार निजी अस्पतालों में ले जाने को मजबूर होते हैं।
विज्ञापन


जिला महिला अस्पताल में करीब 20 दिन से आपरेशन से होने वाली डिलीवरी की व्यवस्था बंद है। स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. डौली अग्रवाल 16 दिसंबर से नहीं आ रही हैं। ऐसे में जिला महिला अस्पताल में सिर्फ नार्मल डिलेवरी की सुविधा उपलब्ध है।

अगर किसी गर्भवती महिला की स्थिति आपरेशन होने की लगती है तो उसे आगरा रेफर कर दिया जाता है। गरीब मरीज के तीमारदार आगरा जाने या फिर प्राइवेट अस्पताल में जाने को मजबूर होते हैं। जिला महिला अस्पताल में गरीब परिवार की महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं।
विज्ञापन


ऐसे में आपरेशन की स्थिति में रेफर कर दिया जाता है। प्राइवेट अस्तालों में आपरेशन डिलीवरी के 25 से 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। यह धनराशि जुटाना मुश्किल भरा हो जाता है। जिला महिला अस्पताल में दलाल सक्रिय रहते हैं। अस्पताल में पुरुषों के प्रवेश पर रोक है तो आशाओं की ड्रेस में महिला दलाल घूमती रहती हैं।

रेफर का नाम सुनकर सक्रिय हो जाती हैं और गर्भवती के परिजनों को फंसाना शुरू कर देती हैं और निजी अस्पतालों में रेफर करा कर ले जाती हैं। इन दलालों के पास एंबुलेंस की सुविधा से लेकर अस्पताल में भर्ती कराने की जिम्मेदारी होती है।

चिकित्सकों की दिक्कत लंबे समय से चली आ रही है। सीएमएस होते हुए भी मुझे रात की ड्यूटी करनी पड़ती है या मेडिकल करने भी जाना पड़ता है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ एक थी, जो फिलहाल नहीं आ रही हैं। संभवत: वह चिकित्सक जल्द ही उपस्थित हो।
डा. साधना राठौर, सीएमएस

सौ शैया महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं का हाल रामभरोसे है। एक मात्र बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जो तीन जनवरी से 20 जनवरी तक अवकाश पर चल रहे हैं। बच्चों को जन्म के तुरंत बाद जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ के पास रेफर कर दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें