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परीक्षा में लगे कैमरे तो 13 हजार ने छोड़ा मैदान

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मैनपुरी। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर रोक लगी तो 13 हजार से अधिक परीक्षार्थी मैदान छोड़ कर भाग गए। वहीं बार-बार परीक्षा पास करने वालों के भी मंसूबों पर पानी फिर गया। नकल पर सख्ती का असर जिले भर में दिखाई दे रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश पूर्व के वर्षोें में नकल के लिए जाना जाता था, लेकिन जिस प्रकार से नकल पर रोक लगी है उससे नकल माफिया के मंसूबे पस्त हो गए हैं। वर्ष 2018 की परीक्षा में जिले में हाईस्कूल के 47043 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। वहीं इंटरमीडिएट में 35835 छात्र-छात्राओं के साथ कुल 82878 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे।
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जबकि वर्ष 2019 की परीक्षा के लिए जिले में हाईस्कूल के 36740, व इंटरमीडिएट के 33121 के साथ कुल 69861 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं। 2018 की अपेक्षा 2019 में जिले में हाईस्कूल में 10303 तथा इंटरमीडिएट में 2714 कुल 13017 छात्र-छात्राएं कम होंगे। यह जिले में रोकी गई नकल का ही असर है। नकल पर नकेल का असर जिले में पूरी तरह से दिखाई देने लगा है। नकल रोकने में सबसे अधिक कारगर सीसीटीवी कैमरे माने जा रहे हैं।

इसलिए फिर बैठते थे परीक्षा में
मैनपुरी। सेना में भर्ती की इच्छा रखने वाले युवक एक बार परीक्षा पास करने के बाद जो संबंधित भर्ती प्रक्रिया के लिए ओवरएज हो जाते थे वह किसी भी कॉलेज में पुन: कक्षा नौ में नाम बदलकर दाखिला लेकर बोर्ड परीक्षा में शामिल हो जाते थे। नकल पर नकेल लगने के बाद ऐसे अभ्यर्थियों को धक्का लगा है। इस वर्ष ओवरएज छात्रों की संख्या कम दिख रही है।
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कोचिंग सेंटरों पर बढ़ गई भीड़
मैनपुरी। बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर रोक लगी तो इस वर्ष कोचिंग सेंटर संचालकों की भी बल्ले-बल्ले हो गई। नगर में सुबह-शाम कोचिंग सेंटरों पर सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं को आते- जाते देखा जा रहा है। जबकि पूर्व की वर्षों में छात्र-छात्राएं कोचिंग छोड़ नकल के बल पर परीक्षा में पास हो जाते थे।

कम होते चले गए परीक्षा केंद्र
मैनपुरी। वर्ष 2017 की बोर्ड परीक्षा में जिले में हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों के लिए 2017 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। जबकि वर्ष 2018 में केंद्रों की संख्या घटकर 121 रह गई थी। वहीं वर्ष 2019 की बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में अब तक 101 परीक्षा केंद्र ही प्रस्तावित किए गए हैं।

किसी भी कीमत पर जिले में नकल नहीं होने दी जाएगी। खराब छवि वाले कॉलेजों को परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर कर दिया गया है। राजकीय व सहायता प्राप्त कॉलेजों को अधिक से अधिक केंद्र बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त वित्तविहीन में उन्हीं कॉलेजों को केंद्र बनाया जा रहा है जिनकी छवि अच्छी है।
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सर्वेश कुमार, डीआईओएस
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