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नोटबंदी के संकट से अब उबर रहा कांच उद्योग

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नोटबंदी - फोटो : SELF
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फिरोजाबाद। पीएम नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 की रात में नोटबंदी की घोषणा की थी। रातों-रात बाजार में पांच सौ और एक हजार के नोटों का चलन बंद होने से कांच उद्योग में ऊथल-पुथल मच गई थी। दो साल पहले नोटबंदी से एकदम धड़ाम हुआ उद्योग संकट से धीरे-धीरे उबर रहा है।
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कांच और चूड़ी उद्योग पूरी तरह नगद भुगतान पर निर्भर है। कांच कारखानों में कार्यरत हजारों श्रमिकों को सेवायोजक नकद भुगतान करते हैं। बाहर से आने वाले कच्चे माल के रूप में हर रोज लाखों रुपये का भाड़ा भी नकद भुगतान होता है। दो साल पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने रात में हजार और पांच सौ के नोट बंद करने की घोषणा की, जिससे कांच उद्योग का पहिया पूरी तरह पटरी से उतर गया था। चार दर्जन से अधिक कारखानों में कार्य पूरी तरह ठप हो गया। हालांकि समय के साथ-साथ कांच उत्पादन का पहिया भी घूमने लगा।

नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर सोशल मीडिया पर खूब मैसेज चले। सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी-अपनी तरीके से प्रतिक्रिया दी। पांच और हजार के नोटों पर किसी ने माला दर्शायी तो दो हजार के नोट पर हैप्पी बर्थडे लिखा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस इंडिया की मुहिम परवान नहीं चढ़ सकी है लेकिन डिजिटल पेमेंट की तरफ लोगों का रुझान बढा है। कई होटल टैक्स से बचने के लिए डिजीटल पेमेंट को बढ़वा नहीं देते हैं। साथ ही इलेक्ट्रोनिक्स एवं गैजेट्स मार्केट में भी कैशबैक का फायदा उठाने के लिए पिछले एक साल में डिजीटल इंडिया पेमेंट में बढ़ोत्तरी हो रही है।

दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट के निदेशक हनुमान प्रसाद गर्ग का कहना है कि नोटबंदी की घोषणा को दो साल पूरे हो गए हैं। नोटबंदी होने के कारण चूड़ी उद्योग पर भी गहरा संकट था। वर्तमान में भले ही बैंकों से कैश निकासी की सीमा खत्म हो गई है, परंतु नगद भुगतान घटने से व्यापार प्रभावित है।

प्रमुख उद्यमी हेमंत अग्रवाल बल्लू का कहना है कि नोटबंदी दो साल पहले हुई थी। वर्तमान में आदमी नोटबंदी को भूल चुका है, परंतु जीएसटी लगने से परेशान है। नोटबंदी के बाद कांच उद्योग पर जीएसटी की मार पड़ी है। इसका असर दिवाली के व्यापार पर भी पड़ा है।

किराना व्यापारी आलोक मित्तल का कहना है कि नोटबंदी के बाद अभी तक पुरानी स्थिति नहीं लौटी है। वर्तमान में लोग नगद भुगतान अधिक करने से बचते हैं। पहले हजारों रुपये का माल एक साथ खरीद ले जाते थे, परंतु अब पहले की तरह बिक्री नहीं होती है।

जीतेश अग्रवाल का कहना है कि नोटबंदी से अभी तक व्यापार उबर नहीं पाया है। दिवाली के त्योहार पर भी नोटबंदी का असर होने के कारण बिक्री कम हुई है। इसका कारण है कि हर आदमी पढ़ा लिखा नहीं है। सामान खरीने के लिए पैसे की जरूरत होती है। अधिकांश लोग कैशलेस भुगतान से डरते हैं।


- दवा विक्रेता बैजनाथ सिंह ने कहा कि नोटबंदी के दौरान हमने स्वैप मशीन के लिए आवेदन किया था। काफी समय तक मशीन नहीं लगी थी। अन्य मोबाइल एप की सुविधा कर रखी है, मगर पूरे दिन में दो से तीन लोग ही आनलाइन पेमेंट करते हैं। ग्राहकों में जागरुकता की कमीं हैं।

- पार्कर इलेक्ट्रोनिक्स स्वामी अनुदीप बग्गा ने बताया कि कैशलेस भुगतान के प्रति अभी अधिक जागरूकता की जरूरत है। वैसे कैशलेस पेमेंट की बढ़ोत्तरी हो रही है। क्योंकि आनलाइन पेमेंट करने पर कैशबैक की सुविधा है।

- मोनार्क होटल के मैनेजर वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि हमारे यहां हर चीज का बिल टैक्स लगाकर दिया जाता है। इसलिए न हमें और न ग्राहक को डिजीटल पेमेंट देने में परेशानी नहीं होती है। डिजीटल पेमेंट की हमारे यहां बढ़ोत्तरी हुई है।

- किड्स कार्नर स्कूल के प्रशासक मयंक भटनागर ने कहा कि डिजिटल पेमेंट के लिए हमने स्वैप मशीन लगवाई थी। मगर अब तो उसका प्रयोग अभिभावक करते ही नहीं करते थे। बमुश्किल दो, तीन प्रतिशत अभिभावकों ने डिजिटल पेमेंट किया।
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