कासगंज। सोरों के पौराणिक मठ मंदिरों से सहज छेड़छाड़ करना एक चुनौती का काम है। इसका प्रमुख कारण मठ मंदिरों के स्ट्रक्चर का कई शताब्दियों पुराना होना हैं। सोरों के विकास का खाका तैयार करने वाले आर्किटेक्ट पूरी सावधानी के साथ पौराणिक स्थलों के विकास की योजना को बना रहे हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है, जो पुराने स्ट्रक्चर को सजाने संवारने में माहिर हैं।
सीताराम मंदिर, दूधेश्वर मंदिर सहित अन्य पौराणिक स्थल काफी प्राचीन होने के कारण उनका सुंदरीकरण चुनौती है। वहीं वराह मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, संत तुलसीदास के गुरु की पाठशाला और अन्य मठ मंदिर भी काफी प्राचीन हैं। आर्किटेक्ट की टीम के समक्ष चुनौती है कि इन स्थानों के स्ट्रक्चर में बिना कोई परिवर्तन किए सजाने संवारने का कार्य कराया जाए। पुराने भवनों की विशेषज्ञ आर्किटेक्ट चांदनी चौधरी भी अहमदाबाद से यहां पहुंची हैं। इसके अलावा आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ मनीष शर्मा एवं राजस्थानी शैली के विशेषज्ञ आर्किटेक्ट अंकित गुप्ता को जयपुर से आर्किटेक्ट अब्दुल रऊफ ने विशेष सलाह मशविरा के लिए आमंत्रित किया है। विशेषज्ञ टीम ने तीर्थनगरी के महत्वपूर्ण पौराणिक स्थलों का निरीक्षण किया है। विशेषज्ञों की सलाह से पौराणिक स्थलों को भव्य रूप दिया जाएगा।
- तीर्थनगरी सोरों में कई ऐसे पुराने मंदिर और स्थान हैं, जो 300 से अधिक वर्ष पुराने हैं। इन पौराणिक स्थलों को सुरक्षित करते हुए कार्य कराने के लिए विशेषज्ञ आर्किटेक्ट की टीम बुलाई गई है। अब्दुल रऊफ, आर्किटेक्ट