मथुरा। तीन दिन पूर्व हुई बरसात और ओले गिरने से किसानों पर दो तरफा मार पड़ रही है। बरसात और हवा से गिर गई फसल को किसान काट नहीं पा रहा है, वहीं भीग गए गेहूं को खरीद केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा। किसानों का गेहूं अधिक गीला होने पर लौटाया जा रहा है। इससे खरीद केंद्रों पर आधा भी गेहूं नहीं खरीदा जा रहा।
एक अप्रैल से जनपद में 91 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए 91 गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं। चार दिन पहले बोरा खत्म होने पर पुराने बोरों में खरीदे गए गेहूं भरवाने के चलते मार्का व वित्तीय वर्ष की मुहर न लगने के कारण गेहूं जमा करने से रोक दिया था, अब बरसात के बाद से गीले हुए गेहूं को नहीं खरीदा जा रहा। गीले गेहूं को लेकर खरीद केंद्र पहुंचे किसानों को लौटाया जा रहा है। बरसात होने के बाद केंद्रों पर आधा गेहूं भी नहीं खरीदा जा रहा। जबकि 12 प्रतिशत नमी वाले गेहूं को खरीदने के आदेश प्रदेश सरकार ने किए हैं।
शुक्रवार को 25 हजार क्विंटल के सापेक्ष 20 हजार क्विंटल ही गेहूं खरीदा जा सका, वहीं शनिवार को केवल 11 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हुई। रविवार को केंद्रों पर गेहूं खरीद नहीं हो सकी। केंद्रों पर गेहूं लेकर पहुंचे किसानों को गेहूं सुखाने की कह दिया गया। मलसराय खरीद केंद्र पर केवल 50 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका। देवी आटस में 58 क्विंटल गेहूं खरीदा जा सका। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजेश्वर सिंह ने बताया कि केंद्रों पर किसान जो गेहूं ला रहे हैं उसमें 13 से 14 प्रतिशत नमी हैं। किसानों को गेहूं थोड़ा सुखाने को कहा गया है। आगामी दिनों में पूरी तेजी से खरीद कराई जाएगी।
गीले गेहूं से लदे खड़े हैं 50 ट्रक
मथुरा। पुराने बोरों में किसानों से खरीदे गए गेहूं को एफसीआई कर्मी गोदाम में जमा नहीं कर रहे। पुराने बोरों पर नया मार्का लगाने और चालू वित्तीय वर्ष की मोहर लगाने के बाद भी गेहूं को जमा नहीं किया जा रहा। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजेश्वर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को 15 ट्रकों का गेहूं एफसीआई गोदाम व वेयर हाउस में उतरवा दिया, इसके बाद फिर से गेहूं नहीं उतरवाया जा रहा। इससे खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
गेहूं खरीद की वीडियो कांफ्रेंस में ली जानकारी
मथुरा। बरसात व ओलावृष्टि से हुए नुकसान तथा गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर रविवार सायं प्रमुख सचिव ने वीडियो कांफ्रेंस की। इसमें गेहूं खरीद के नोडल प्रभारी एडीएम वित्त रविंद्र कुमार व खरीद केंद्र एजेंसियों के प्रभारियों से जानकारी मांगी।