फिरोजाबाद। गर्मी का मौसम शुरू हो गया हैै। संक्रामक बीमारियों के इस मौसम में पेयजल टंकियों की सफाई की तरफ अभी तक नगर निगम ने ध्यान नहीं दिया है। टंकियों पर सफाई की जो तारीख अंकित है वह चौंकाने वाली है। वर्षों से टंकियों की सफाई नहीं हुई है। ऐसे में शहर की जनता को पीने के लिए कैैसा पानी मिल रहा है इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
सुहागनगरी की सात लाख से अधिक आबादी को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन के ऊपर है, लेकिन वर्षों बाद भी आधी आबादी को नगर निगम प्रशासन शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं करा पा रहा। नगर निगम द्वारा जनता को पानी मुहैया कराने के लिए शहर में 28 ओवरहैड टैंक और 14 भूमिगत जलाशय बनवाए गए हैं।
इन्हें भरने के लिए शहर में 200 से अधिक नलकूप लगे हैं। टंकियों से जनता को शुद्ध पेयजल मिले, इसके लिए ओवरहैड टैंक व सीडब्लूआर की नियमानुसार हर साल सफाई होनी चाहिए, परंतु यहां तो लापरवाही का आलम है कि वर्षों से इनकी सफाई नहीं हुई।
नगर निगम प्रशासन द्वारा आगरा गेट ओवरहैड टैंक की सफाई वर्ष अप्रैल-2006 में कराई गई थी। जलकल विभाग में वर्षों पुराने बने सीडब्लूआर की सफाई जून-2013 में हुई। सुहागनगर सेक्टर स्थित ओवरहैड टैंक की सफाई नवंबर-2014 में हुई।
इसी प्रकार शहर में कई ऐसे ओवरहैड टैंक और सीडब्लूआर हैं, जिनकी नगर निगम ने सालों से सफाई कराने की सुध नहीं ली। नगर निगम की लापरवाही के चलते शहर में लेबर कालोनी, कोटला मोहल्ला, हिमायूंपुर ग्रीनपार्क, गांधी नगर, गणेश नगर रसूलपुर सहित कई ऐसी टंकियां हैं जिन पर सफाई की कोई तिथि तक अंकित नहीं है।
वर्ष 2010 में शहर के संत नगर में दूषित पेयजल आपूर्ति के चलते डायरिया फैला था, जिसमें कई बच्चों की मौत हो गई थी। मामला शासन तक पहुंचा था तो नगर पालिका के कई कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था।
अंबेडकर नगर सैलई में दो माह पूर्व दूषित पानी पीने के कारण एक युवक की मौत हो गई थी। युवक की मौत के बाद कुछ दिन नगर निगम के अधिकारी क्षेत्र में दौड़े, फिर मामला शांत हो गया।
शहर के जिन मोहल्लों में पूर्व में डायरिया फैल चुका है, ऐसे क्षेत्रों का स्वास्थ्य विभाग द्वारा गत वर्ष सर्वे कराया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने मलिन बस्ती संतनगर, कौशल्या नगर, हिमांयूपुर, सैलई, रसूलपुर, सत्यनगर, टापा, आसफाबाद आदि का भ्रमण किया। सीएमओ डा. एसके दीक्षित, डा. आरएन गुप्ता सहित अन्य लोगों ने निरीक्षण किया। सर्वे रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन को भेजी थी।