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जिला अस्पताल: यहां 20 सेकेंड में होता है इलाज

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जिला अस्पताल: यहां 20 सेकेंड में होता है इलाज - फोटो : अमर उजाला
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एटा।
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जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों का उपचार करने में चिकित्सक 20 सेकेंड लेते हैं। यहां एक चिकित्सक के हवाले हर रोज 125 मरीज होते हैं। बदलते मौसम और जीवन स्तर से बीमारियों का ग्राफ बढ़ रहा है तो मरीजों की संख्या भी हर रोज बढ़ती जा रही है लेकिन जिला अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पा रही है। 27 पद हैं लेकिन कार्यरत सिर्फ 15 ही चिकित्सक हैं।
जिला अस्पताल के 15 में से दो चिकित्सक एक एडी हेल्थ कार्यालय में संबद्ध हैं। अब शेष 13 में एक इमरजेंसी और एक सीएमएस कार्यालय में है। जिला अस्पताल मेें सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक चलने वाले ओपीडी में रोजाना औसतन 1500 मरीज पहुंचते हैं। इन 1500 मरीजों का जिम्मा 11 चिकित्सक संभालते हैं। पिछले साल शासन ने छह चिकित्सकों का जिला अस्पताल एटा में तबादला किया था, लेकिन अब तक एक डाक्टर ने आमद कराई है। जुलाई में हुए तबादलों के बाद पांच चिकित्सकों ने ज्वाइनिंग की ही नहीं। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से हर बार चिकित्सकों की कमी और तैनाती को लेकर शासन को पत्र लिखे जाते हैं, लेकिन शासन हर बार पत्रों को दरकिनार कर देता है। बदलते मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ती है। वायरल, मलेरिया, डेंगू के पनपने पर ओपीडी में मरीजों की संख्या 1800 तक पहुंच जाती है। लेकिन चिकित्सकों का अभाव है।
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चिकित्सकों की कमी को लेकर कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। 15 में से दो संबद्ध हैं। जबकि मुझ समेत 13 चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सकों की कमी है। व्यवस्थाओं को सुचारु कर रहे हैं। मरीजों को बेहतर सुविधा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
डा. एसके मजूमदार, सीएमएस

27 पद हैं जिला अस्पताल में चिकित्सकों के
15 चिकि त्सकों की है तैनाती
02 डाक्टर अन्य कार्यों से संबद्ध
125 मरीज देखते हैं एक डाक्टर
1500 मरीज औसतन रोज पहुंचते हैं जिला अस्पताल

प्रसव के नाम पर मांगा सुविधा शुल्क
मिरहची। नगला चहबच्चा निवासी महिला कुसमा पत्नी उमेश कुमार को 17 फरवरी की रात को प्रसव पीड़ा हुई, जिसे परिजन मिरहची पीएचसी पर एंबुलेस से ले गए। परिवार के लोगों का आरोप है जहां पर तैनात स्टाफ नर्स ने उपचार के दौरान दो हजार रुपये की मांग की नहीं देने पर अस्पताल से भगा दिया। तड़पती महिला को परिजन प्राइवेट वाहन से कासगंज के एक प्राइवेट नर्सिंग होम ले गए। डीएम से मामले की शिकायत की।

बिना दवा एवं संसाधनों के जिले में दौड़ रही 108
घटना स्थल से अस्पताल तक मरीज,घायल को पटकने तक सीमित हो रही सरकारी एम्बुलेंस
अमर उजाला ब्यूरो
एटा।
बिना दवा और संसाधनों के ही जिले में सरकारी एंबुलेंस दौड़ रही हैं। मरीज और घायल को केवल एंबुलेंस अस्पताल तक ले जाने का काम कर रही है। गाड़ी में कोई प्राथमिक उपचार तक देने की सुविधा नहीं है। न ही कोई दवा की किट एंबुलेंस में रखी गई है।
शासन स्तर से बीमार और हादसो में घायल होने वाले लोगों को नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सरकारी एंबुलेंस संचालित की है। जिसमें स्ट्रेचर, दवाएं और ऑक्सीजन सिलेंडर तक होते हैं प्राथमिक उपचार के साथ अन्य कई सुविधाएं भी होती हैं। लेकिन जिले में जो एंबुलेंस संचालित हैं वो सिर्फ मरीज को अस्पताल तक ले जाने का काम कर रही है। हादसो में घायल होने वाले लोगों को प्रथम उपचार के नाम पर एक गोली भी नहीं दी जाती है।
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सरकारी एंबुलेंस में प्रथम उपचार के लिए सभी दवाएं, संसाधन उपलब्ध हैं। इसके बाद भी कोई एंबुलेंस टीम का सदस्य दवाएं न होने की बात कहता है तो उसकी गोपनीय तरीके से जांच कराते हुए कार्रवाई कराई जाएगी।
- जयपाल सिंह, कोर्डीनेटर 108 एम्बुलेंस
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