एटा। मौसम के अनुसार ठंड न पड़ने से किसान मायूस हैं। उन्हें गेहूं, सरसों आदि के उत्पादन की चिंता सताने लगी है। मौसम का मिजाज नहीं बदला तो पैदावारी पर भी असर पड़ सकता है।
साल के अंतिम दिन चल रहे हैं। जनवरी आने वाली है। मगर अभी तक ठंड का प्रकोप नहीं दिख रहा। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बसंत जैसे मौसम से आम आदमी भले ही खुश है, लेकिन किसानों के माथों पर बल है। उन्हें लागत के बाद भी उत्पादन की चिंता सताने लगी है। असरौली निवासी किसान पुष्पेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि अभी तक पूर्व वर्षों की भांति ठंड नहीं पड़ रही। फसलों पर इसका बुरा असर जा रहा है। सर्वाधिक प्रकोप गेहूं की फसल पर दिखेगा।
कृषि विशेषज्ञ डॉ आरएल राजपूत के अनुसार अधिक तापमान से गेहूं में होने वाली टिलरिंग (किल्ले) प्रक्रिया धीमी है। पौधे का पूरा विस्तार एवं विकास नहीं होगा। यदि दो सप्ताह तक ऐसा ही मौसम रहा तो उत्पादन प्रभावित होगा। इस वर्ष जिले में गेहूूं का आच्छादन क्षेत्र एक लाख 33 हजार हेक्टेयर है। जबकि गत वर्ष 1.30 लाख हेक्टेयर में औसत उत्पादन 33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहा था।
वर्तमान तापमान फसलों के लिए ठीक नहीं है। इससे पौधे का विकास रुक रहा है। किल्ले व फूलवाली की प्रक्रिया भी बाधित है। अगौती बुआई में भी नुकसान की आशंका है। यदि ऐसा ही मौसम रहा तो उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है। इस वर्ष जिले में 1.33 लाख हेेक्टेयर में गेहूं की फसल है।
डॉ सर्वेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी