आगरा। नगर निगम पार्षद पद के लिए चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे 704 प्रत्याशियों में से 521 प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए हैं। बहुत से ऐसे प्रत्याशी रहे, जो दहाई का अंक भी नहीं छू पाए। स्थिति यह रही कि 24 वार्डों पर विजेता के अलावा कोई अपनी जमानत नहीं बचा पाया। सिर्फ दो वार्ड ऐसे थे, दो प्रत्याशी होने के कारण किसी की जमानत जब्त नहीं हुई।
इस बार सभी दलों ने अपने चुनाव चिह्न पर नगर निगम का चुनाव लड़ा। सभी ने अपने-अपने लड़ाके चुनावी मैदान में उतारे। यह अलग बात है कि भाजपा-कांग्रेस को छोड़ बसपा, सपा, रालोद, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार को नहीं आए। इसकी वजह से इन पार्टियों के अधिकांश प्रत्याशियों की हवा भी नहीं बन पाई। यह अलग बात है कि जातिगत समीकरणों के चलते बसपा अपने पार्षद को जिताने में दूसरे नंबर पर रही।
शहर की संसद में कांग्रेस, सपा, रालोद, आप जैसी पार्टियों की अपेक्षा निर्दलीय प्रत्याशी ज्यादा पहुंचे। 53 पार्षदों के साथ भाजपा सबसे आगे रही। शेष वार्डों में से अधिकांश पर भाजपा दूसरे नंबर पर रही। मगर, 704 प्रत्याशियों में से अधिकांश अपने-अपने क्षेत्रों में अपना रंग नहीं जमा पाए।
इसका नतीजा यह रहा कि मतदाताओं ने भी उन्हें सिरे से नकार दिया। इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) जब खुली तो इनके वोट ही नहीं निकले। वार्ड 73 सिकंदरा में निर्दलीय प्रत्याशी अचल सिंह को सिर्फ छह वोट मिले। वार्ड 41 आजमपाड़ा में निर्दलीय प्रत्याशी रामकिशोर को सिर्फ नौ वोट, वार्ड 54 ट्रांसयमुना में धर्मेंद्र यादव को नौ और दीपक वर्मा को आठ वोट मिले। ऐसे बहुत से प्रत्याशी रहे, जिनको दो अंकों में भी वोट नहीं मिले।