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आछ दशक बाद भी नहीं बनी शहीद की प्रतिमा

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Freedom fighter
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एटा। लाहौर षड्यंत्र केस के अग्रणी क्रांतिकारी स्वर्गीय महावीर सिंह की उपेक्षा से जिले के लोग मायूस हैं। इनका आरोप है कि मोदी-योगी सरकार में भी शहीद को न्याय नहीं मिल रहा। शासन प्रशासन की उपेक्षा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोगों की मांग के बाद भी जिले में शहीद की प्रतिमा नहीं लगी है।
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16 सितंबर 1905 को जिले के सीमांत गांव शाहपुर टहला में जन्में महावीर सिंह जन्म से ही क्रांतिकारी प्रकृति के थे। पंद्रह वर्ष की उम्र में ही वे अंग्रेजी हुकूमत की आंखों की किरकिरी बन गए। 1920 में कासगंज में अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध नारेबाजी के आरोप में इन्हें गिरफ्तार कर जिला कलेक्टर ने सजा सुनाई। फिर क्या था, महावीर सिंह के दिल में धधक रहा आजादी का शोला और मुखर हो गया।
राजा का रामपुर के पूर्व चेयरमैन महावीर सिंह राठौर के अनुसार परिवार की इकलौती संतान के इरादे भांप कर पिता ने 1925 में इन्हें अग्रिम शिक्षा के लिए कानपुर डीएवी कालेज भेज दिया। वहां भी महान क्रांतिकारियों सुखदेव, जयदेव कपूर का सानिध्य मिला। चंद्रशेखर आजाद एवं भगत सिंह से मुलाकात के बाद तो देशभक्ति का जज्बा और मुखर हो गया। कुछ दिन यह लाहौर में भी रहे।
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लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन में गंभीर घायल हुए लाला लाजपत राय के निधन के बाद पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्याकांड में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु के साथ महावीर सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई। पुलिस के दबाव के चलते भूमिगत हुए महावीर सिंह इसी दौरान विभिन्न स्थानों पर घूमते रहे। लेकिन आठ अप्रैल 1929 में भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की केंद्रीय असेंबली पर बम फेंककर अंग्रेजी सरकार को ही चुनौती दे दी। महावीर सिंह को कासगंज के एक बुकसेलर के यहां से गिरफ्तार कर लिया गया। सरकार इतनी भयाक्रांत थी उसने महावीर सिंह को बीमारियों की जेल अंडमान निकोबार भेज दिया। जहां 17 मई 1933 में उनकी मौत हो गई। और अंग्रेजी हुकूमत ने परिवारीजनों को बिना कोई सूचना दिए ही उनके शव को रात में ही समुद्र के हवाले कर दिया।

शहीद के नाम पर बालिका विद्यालय का संचालन करने वाले बलवीर सिंह राठौर का कहना है कि देश के लिए जान गंवाने वाले शहीद की उपेक्षा से लोगों में आक्रोश है। क्षेत्रीय लोगों ने शासन प्रशासन से शहीद की प्रतिमा लगवाने की मांग की लेकिन जिला स्तर पर शहीद की कोई प्रतिमा नहीं लगवाई गई।
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