आगरा। यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए यमुना एक्शन प्लान के तहत करीब 500 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन यमुना का प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है।
शहर में संचालित सात सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में से पांच प्लांट सीवेज शोधन में कारगर नहीं हो पा रहे हैं। प्रदूषण विभाग की जांच में सीओडी और बीओडी की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल निगम को भेजी गई रिपोर्ट में कहा कि शहर में संचालित सात सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में से पांच सीवेज प्लांटों को पूर्ण क्षमता से सीवेज प्राप्त हो रहा है। दो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट देवरी रोड और बिचपुरी को पर्याप्त सीवेज न मिलने के कारण दोनों पूर्ण क्षमता से नहीं चल पा रहे हैं।
प्रदूषण विभाग ने फरवरी में जो नमूने लिए गए हैं, उनके विश्लेषण से पता चला है कि पीएचटीएसएस मानकों के अनुरूप है लेकिन नगला बूढ़ी, जगनपुर, पीलाखार एसटीपी पर सीओडी और बीओडी मानकों से अधिक पाई गई है। शहर में एक 55 एमएलडी का एक नया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है लेकिन जमीन उपलब्ध होने के बावजूद उसका निर्माण प्रारंभ नहीं हुआ है।