आगरा। भूमाफिया पर कार्रवाई के जितने ढोल पीटे जा रहे हैं, हकीकत में उतना कुछ भी नहीं हो रहा है। पुलिस के अधिकारी रोज सूची-सूची खेल रहे है। कागज पर सूची बनाई जाती है, फिर मिटा दी जाती है, इसके बाद नई सूची बनती है, लेकिन फाइनल नहीं होती है। इसी तरह दस दिन बीत गए हैं। विभिन्न महकमों ने पुलिस को 150 भूमाफिया की सूची दे दी है। पुलिस ने एक पर भी कार्रवाई नहीं की है।
इस सूची में बिल्डरो और स्कूल संचालकों के नाम भी हैं। इनके अलावा एक सूची सेना के अधिकारियों ने उन लोगों की दी है जिन्होंने छावनी में सेना की जमीन पर कब्जा रखा है। तहसील ने उन लोगों की सूची दी है जिन्होंने अग्निशमन विभाग की जमीन कब्जा ली। सारी सूचियां पुलिस के पास हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इन सूचियों पर अभी यह विचार हो रहा है कि किसका नाम रखना है और किसका निकालना है? इसके लिए कोई फार्मूला तैयार नहीं किया गया है। यही वजह है कि अभी तक पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई फाइनल सूची जारी नहीं की गई है। भूमाफिया से कब्जाई गई जमीन खाली करानी है। उन पर गुंडा एक्ट और गैंगेस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किए जाने हैं।
हाथ पर हाथ धरे बैठी है टास्क फोर्स
आगरा। पुलिस प्रशासन की ढिलाई का यह हाल तब है जबकि एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन एक महीने पहले कर लिया गया था। तहसील, जिला और मंडल स्तर की टास्क फोर्स बनाई गईं। जब भूमाफिया की सूची ही नहीं है तो टास्क फोर्स किस पर कार्रवाई करे। गठन के बाद टास्क फोर्स को कार्रवाई के लिए भेजा गया था लेकिन यह सरकारी जमीन पर बिटौरे बनाने और झोंपड़ियां डालने वालों तक सीमित रही।
भारी पड़ा अधिकारी की शिकायत करना
आगरा। राम बाग के रहने वाले मनोज कुशवाहा का नाम लोक निर्माण विभाग ने भूमाफिया के रूप में चिह्नित कर पुलिस को दिया है। मनोज का कहना है कि उसने जमीन के एक मामले में तत्कालीन एसपी क्राइम आनंद कुमार की शिकायत की थी। आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। अब उसे भूमाफिया बना दिया गया है। उसका जिस शख्स से जमीन का विवाद है, उस पर कार्रवाई नहीं की। मनोज ने एसपी सिटी से इसकी शिकायत की है।