यूपी हाईकोर्ट की स्थापना 1866 को आगरा में की गई थी। इसकी 100वीं वर्षगांठ भी यहीं धूमधाम से मनाई गई। फिर 150वीं वर्षगांठ इलाहबाद में मनाने का औचित्य क्या है? यह सवाल उठाया है आगरा के अधिवक्ताओं ने। उनका कहना है कि जब शताब्दी वर्ष समारोह ताजनगरी में मनाया गया, तो 150वीं वर्षगांठ भी यहीं पर मनानी चाहिए।
अधिवक्ताओं ने बताया कि तब के संयुक्त प्रांत (आज के उत्तर प्रदेश) के उच्च न्यायालय की स्थापना सदर न्यायालय के रूप में 1866 में आगरा में की गई थी। उस समय ब्रिटिश हुकूमत थी। ताजनगरी में आजादी के दीवानों ने फिरंगियों की नाक में दम कर रखा था। अंग्रेजी सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों के डर से उच्च न्यायालय अस्थाई रूप से इलाहाबाद स्थानांतरित कर दिया था।
1966 में उच्च न्यायालय स्थापना की 100वीं वर्षगांठ का समारोह भी आगरा के उसी सदर न्यायालय भवन में भव्य रूप से मनाया गया था। इसमें मुख्य अतिथि हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस वसीउल्ला बेग रहे। अब 13 मार्च को 150वीं वर्षगांठ के समारोह का आयोजन इलाहाबाद में किए जाने की जानकारी मिलने पर ग्रेटर आगरा बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव दुर्गविजय सिंह भैया एडवोकेट ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा कि कम से कम समारोह का प्रथम कार्यक्रम आगरा में किया जाना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता अचल कुमार शर्मा, करतार सिंह भारतीय, अभय पाठक, अमीर अहमद का सवाल है कि 150वीं वर्षगांठ इलाहाबाद में मनाए जाने का क्या औचित्य है? यह आयोजन आगरा में ही होना चाहिए।