मैनपुरी/औंछा। शिक्षामित्रों का सहायक के पद पर समायोजन रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बुधवार को जिले के करीब 700 विद्यालय नहीं खुल सके। यह विद्यालय शिक्षामित्रों से नियुक्त किए गए सहायकों के सहारे ही चल रहे थे। इन स्कूलों में बुधवार सुबह बच्चे तो पहुुंचे, लेकिन अध्यापकों के न आने पर वह इंतजार कर लौट गए।
उल्लेखनीय है कि जिले में 2145 शिक्षामित्र तैनात थे। इनमें से 1992 शिक्षामित्रों का समायोजन सहायक अध्यापक के पद पर किया जा चुका था। शिक्षकों की कमी के चलते जिले के सात सौ से अधिक स्कूल इन्हीं सहायकाें या शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे थे। अब सुप्रीम कोर्ट के समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद जिले में बेसिक शिक्षा की नींव हिल गई है।
इसके चलते बुधवार को जगह-जगह स्कूलों पर ताले लगे नजर आए। विद्यालय में पढ़ने आने वाले बच्चे इधर-उधर भटकते रहे बाद में घर लौट गए। विद्यालय बंद होने से अभिभावकों को भी अपने बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए अभी तक शासन से कोई निर्देश न मिल पाने के कारण अधिकारी भी लाचार दिखे।
शिक्षामित्रों का सहायक के पद पर समायोजन रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बुधवार को शिक्षामित्रों ने जिला मुख्यालय पर कलक्ट्रेट स्थित तिकोनिया पार्क में प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। मांग की है कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में शीघ्र पुनर्विचार याचिका दाखिल करे। शिक्षामित्रों की भीड़ को देखते हुए धरना स्थल पर पुलिस बल भी मौजूद रहा।
शिक्षामित्र हेमसिंह यादव ने कहा कि 2001 से 2015 तक हम लोग थोड़े से मानदेय पर शिक्षा विभाग में कार्य कर रहे थे। नियुक्ति के समय 90 प्रतिशत शिक्षामित्रों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक थी। जिले में 40 प्रतिशत शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण हैं। शुभम शक्ति भदौरिया ने कहा कि कोर्ट के इस निर्णय के बाद शिक्षामित्रों के सामने परिवार के पालन पोषण की समस्या आ जाएगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्णय के पैरा 26 के अंतिम पंक्ति में शिक्षामित्रों और समायोजित शिक्षक के भविष्य को सुरक्षित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है।