मैनपुरी। बिजली चोरी की रिपोर्ट में जांच के नाम पर पुलिस लापरवाही बरत रही है। जुर्माना अदा करने के बाद भी उनको अदालत के सम्मन के बाद जमानत करानी पड़ रही है। जिससे अदालतों पर भी काम का बोझ बढ़ता जा रहा है।
बिजली चोरी में अगस्त 2016 से जुलाई 2017 तक 486 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी करने की आधे से अधिक मामलों में ग्रामीणों ने समन शुल्क तथा जुर्माना अदा करने के बाद उनकी रसीद विवेचक को दे दी गई। विवेचक ने विवेचना के दौरान उन रसीदों को आरोप पत्र में शामिल नहीं किया। आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद अदालत के भेजे सम्मन के बाद मंगलवार को दो और लोगों ने अदालत पहुंचकर जमानत कराई है।
प्रभारी विशेष न्यायाधीश आवश्यक वस्तु अधिनियम लालचंद्र ने अंगौथा कोतवाली निवासी पूरनसिंह और जयवीर को उनकी दिखाई रसीदों के आधार पर जमानत दे दी। विवेचक की लापरवाही पर नाराजगी जताई।
पांच दिन पहले भी भोगांव क्षेत्र के अजब सिंह, रामप्रकाश को विवेचक की इसी तरह की लापरवाही के चलते अदालत से जमानत करानी पड़ी थी। अधीक्षण अभियंता एके श्रीवास्तव का कहना है इस तरह के मामलों की जानकारी नहीं है। अगर शिकायत मिलेगी तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
अवर अभियंता बरत रहे लापरवाही
बिजली विभाग में पहली बार चोरी पाए जाने पर केवल समन शुल्क वसूल किया जाता है। अगर वही व्यक्ति दोबारा चोरी करते पाया जाता है तो उससे छह गुना तक जुर्माना वसूला जाता है। अवर अभियंता रिपोर्ट लिखाते समय पूर्व में लिखाई रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे विभाग को राजस्व की हानि हो रही है।
एसपी को पत्र लिखा है बिजली चोरी की रिपोर्ट पर जांच करने वाले दरोगा बिजली चोरी करने वाले के दिखाई रसीदों को विवेचना में शामिल करके ही अदालत में रिपोर्ट भेजें। ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
- देवेंद्र सिंह कटारिया, बिजली विभाग के अधिवक्ता