मैनपुरी। अदालतों पर काम का बोझ कम करने को हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं। अदालती प्रक्रिया में पहचान पत्र की अनिवार्यता की गई है। अब कोर्ट से रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आवेदक को शपथपत्र के साथ पहचान पत्र भी जमा करना होगा।
पुलिस में सुनवाई नहीं होने पर पीड़ित अदालत की शरण लेकर अदालत के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराता है। पहले आवेदक शिकायत के साथ अदालत में फोटो चस्पा किया हुआ शपथपत्र देता था लेकिन पहचान पत्र अनिवार्य नहीं था। जिससे अदालतों पर काम का बोझ बढ़ा। काम का बोझ कम करने के लिए हाईकोर्ट ने पहल की है।
जिला अदालतों को आदेश देकर शिकायत के साथ शिकायतकर्ता के पहचान पत्र जमा करने की अनिवार्यता की है। बार एसोसिएशन के सचिव संतोष यादव राजू का का कहना है इस तरह अदालतों पर काम का बोझ कम होगा तथा लोगों को लाभ ही होगा। पूर्व उपाध्यक्ष विनीता भदौरिया का कहना है पहचान पत्र की अनिवार्यता तो की ही जानी चाहिए। कई बार दूसरे पक्ष को परेशान करने के लिए लोग फर्जी तरीके से भी शिकायत कर देते हैं।
धारा 156 (3) की प्रक्रिया
पुलिस में सुनवाई नहीं होने पर सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत पीड़ित अदालत की शरण लेता है। शिकायत के साथ अदालत में शिकायत के समर्थन में शपथपत्र भी जमा करता है। शिकायत पर सुनवाई के लिए अदालत संबंधित थाने से रिपोर्ट भी मंगाती है। थाने की रिपोर्ट के बाद भी अदालत आदेश करती है। अब शिकायतकर्ता को शिकायत के साथ पहचान पत्र भी देना होगा।