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हड़ताल से चिकित्सकीय सेवाएं पटरी से उतरीं

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आगरा। डाक्टरों की एक दिन की हड़ताल से चिकित्सकीय सेवाएं पटरी से उतर गई। क्लीनिक पर ताले लगे हुए थे हास्पिटल में नए मरीजों को भर्ती नहीं किए गए। हालत ये कि एक्सरे-पैथोलॉजी जांच कराने तक को मरीजों को भटकना पड़ा। क्लीनिक के बाहर मरीज इसी आस में बैठे रहे कि डाक्टर साहब आएं और इलाज मिल सके, लेकिन उनको निराशा ही हाथ लगी। 14 सूत्रीय मांगों के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आगरा ब्रांच भी मंगलवार को हड़ताल पर रही। सुबह 10 बजे तोता के ताल स्थित कार्यालय पर एकजुट हुए। यहां दिल्ली के राजघाट पर चल रहे प्रदर्शन का लाइव प्रसारण देखा। यहां से आईएमए के प्रतिनिधि मंडल ने कलक्ट्रेट में एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा। शाम को शहीद स्मारक पर चिकित्सकों ने कैंडल मार्च निकाला। आईएमए अध्यक्ष डा. आरएस कपूर ने बताया कि सीई एक्ट, हास्पिटल प्रोटेक्शन एक्ट, जेनेरिक दवाओं की बाध्यता जैसी मांगें हैं। प्रदर्शन में डा. वीके खंडेलवाल, डा. मुकेश गोयल, डा. डीवी शर्मा, डा. रविंद्र मोहन पचौरी, डा. संदीप अग्रवाल, डा. अरुण चतुर्वेदी, डा. सीमा सिंह, डा. सुनील शर्मा, डा. पंकज नगायच, डा. अजय बुलागन, डा. सुनील बंसल, डा. पवन गुप्ता, डा. राजीव पचौरी आदि रहे।
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दिल्ली धरने में शामिल हुए आगरा से 150 डाक्टर
दिल्ली में हुए राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में भाग लेने के लिए आगरा से 150 डाक्टर पहुंचे। इसमें डा. आलोक मित्तल, डा. सुधीर धाकरे, डा. शरद गुप्ता, डा. हरेंद्र गुप्ता, डा. वाईबी अग्रवाल रहे।

आईडीए ने भी दिया साथ
इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए)ने भी आईएमए का साथ दिया। हड़ताल का समर्थन देते हुए दंत रोग विशेषज्ञों ने भी अपनी क्लीनिक-हास्पिटल बंद रखे। आईडीए अध्यक्ष डा. राजदीप सिंह, सचिव डा. विवेक शाह, डा. सुनीता सिंह, डा. मनीष जैन आदि रहे।
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झोलाछाप ने खूब काटी चांदी
आईएमए की हड़ताल से झोलाछाप की बल्ले-बल्ले हो गई। मरीजों से जमकर कमाई की। खास तौर से घनी बस्तियों और देहात में इनके पास मरीजों की शाम तक भीड़ लगी रही। हड़ताल के चलते झोलाछाप ने दवा के नाम पर मनमानी फीस भी वसूली।

सरकारी संस्थान में 30 फीसदी मरीज बढ़े
डाक्टरों ने मरीज नहीं देखे तो अधिकांश ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का रुख किया। एसएन मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल, लेडी लायल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की संख्या में 30 फीसदी तक की वृद्धि हुई। एसएन की ओपीडी 2600 मरीजों तक पहुंची, औसतन से नए-पुराने मरीजों को मिलाकर 2000 रहती है। इमरजेंसी में 150 तक मरीज रहे, जो 100 के आसपास रहती है। जिला अस्पताल-लेडी लायल में भी ओपीडी एक घंटे अतिरिक्त चली।

शव ले जाने को चार घंटे तक किया एंबुलेंस का इंतजार
एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी में एंबुलेंस संचालकों की अमानवीय व्यवहार किया। यहां शव ले जाने के लिए चार घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। दरअसल, शमसाबाद के नैहना की मां मोहरश्री (55) की सोमवार की तड़के छत पर गिर गई थी। इसे इमरजेंसी लाया गया। सुबह करीब आठ बजे इलाज के दौरान इसकी मौत हो गई। नैहना के पास एंबुलेंस के लायक पैसे नहीं थे, उसने एंबुलेंस चालक से घर जाकर रुपये देने की बात कही, लेकिन कोई एंबुलेंस चालक माना नहीं। अंत में घर पर फोन किया, परिजन रुपये लेकर आया तब जाकर 12 बजे के बाद शव को वह गांव ले जा सका।
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