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पर्यावरण की कीमत पर हो रहा है विकास

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मैनपुरी। शहर का विकास पर्यावरण और मानव की सेहत की कीमत पर हो रहा है। इस विकास के दुष्प्रभाव भी तत्काल देखे जा रहे हैं। इसके बाद भी इसे लेकर जागरूकता सिर्फ गोष्ठियों तक ही सीमित है। धरातल पर आम आदमी से लेकर अधिकारी और विभिन्न संस्थाएं तक कुछ नहीं कर रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के कारण ही शहर की हवा से लेकर भूगर्भ जल तक प्रदूषित हो रहा है। वहीं कम वर्षा, दैवी आपदाएं जैसी अनेक समस्याएं पैदा हो रही हैं। एक और ध्वनि प्रदूषण बढ़ने से कम सुनाई देने जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। विकास के लिए जगह-जगह हो रहे निर्माण कार्य लोगों को सांस और अस्थमा की चपेट में लाते जा रहे हैं।
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विश्व पर्यावरण दिवस पर सोमवार को पर्यावरण के प्रदूषित होने पर चिंता जताई जाएगी। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए वृक्षों के कटान पर रोक और अधिक से अधिक वृक्षारोपण का आह्वान किया जाएगा। दूसरे दिन ही सब कुछ भुला दिया जाएगा। लोगों का कहना है कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए भाषणों की नहीं धरातल पर काम करने की जरूरत है। पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए लोगों को जागरूक भी करना होगा।

नगर की बात करें तो बड़े पैमाने पर विकास कार्य हो रहे हैं। इसके चलते दिन और रात उड़ने वाली धूल लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। धूल से प्रदूषित हुई हवा के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या से यहां के लोगों को अभी एक दो साल और जूझना होगा। सीएमओ डाक्टर एसके वर्मा के अनुसार धूल का गुबार लोगों को श्वांस और अस्थमा का रोगी बना रहा है। उनका कहना है कि धूल फेफड़ों तक जाकर लोगों को मरीज बना रही है। आंखों का लाल होना और आंख की अन्य परेशानी का कारण भी धूल है।
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इसके अलावा बड़े पैमाने पर जिले में हो रहा सड़कों का निर्माण वृक्षों के लिए काल बनकर आया है। सड़कों के चौड़ीकरण के दौरान सबसे पहले पेड़ों पर आरी चलती है। हालांकि नियमानुसार कार्यदायी संस्था को इसके बदले दो गुने पेड़ लगाने पड़ते हैं लेकिन अभी तक किसी भी कार्यदायी संस्था ने पौधरोपण का कार्य नहीं किया है। डिवाइडर पर जरूरी कन्नेर लगा दी गई हैं।

उधर, प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिले में भी अब तक न तो सरकारी और न ही किसी गैर सरकारी संगठन के स्तर से कोई पहल होती नजर आई है। पर्यावरण मित्र को ही लें तो इसके गठन के पीछे मंशा थी कि प्रदूषण के कारणों की खोज और वातावरण को प्रदूषण से मुक्त रखने के प्रयास के साथ लोगों को पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित किया जाएगा। लेकिन पर्यावरण मित्र योजना केवल सरकारी फाइलों में ही सिमट कर रह गई।

पर्यावरण संस्था से जुड़े लोगों का कहना हैं कि अंधाधुंध पेड़ों का कटान और पॉलीथिन का बढ़ता प्रयोग पर्यावरण के लिए खतरा है।

हरियाली प्रोजेक्ट का भी नहीं मिला लाभ
बडे़ पैमाने पर जिले भर में हो रहे पेड़ों के कटान का ही परिणाम है कि हरियाली प्रोजेक्ट में 25 हजार पौधे रोपने के बाद भी जिले के वन क्षेत्र में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं हाल ही में 3.60 लाख पौधे उपलब्ध कराए गए हैं। मगर क्षेत्र पहले के समान ही मात्र 0.5 प्रतिशत पर ही स्थिर है।

इस संबंध में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी का कहना कि फोरलेन सड़क निर्माण कर रही संस्था को काटे गए पेड़ों की एवज में दोगुने पौधे लगाए जाने को कहा गया है। वन विभाग पर्यावरण सुरक्षा को लेकर जागरूक है।

ईशन नदी से गायब हुए जलचर
एक समय शहर के बीच से होकर गुजर रही ईशन नदी में बड़ी संख्या में कछुए, मछली एवं अन्य जलचर बड़ी संख्या में मिलते थे। पर्यावरण से लगातार हो रही छेड़छाड़ के कारण ही जहां नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वहीं नदी में रहने वाले जलचर भी पूरी तरह से लुप्त हो चुके हैं। यहां पर नदी में सिर्फ जलकुंभी ही दिखती है।

कूडे़ का भी नहीं होता सही ढंग से निस्तारण
जिले भर में कूडे़ का सही ढंग से निस्तारण नहीं हो पा रहा है। जगह जगह सफाईकर्मी ढेर लगाकर कूड़ा को जला देते हैं। वहीं कई स्थानों पर कूडे़ को नाले आदि में फेंक दिया जाता है। वहीं ईशन नदी के समीप ही कूडे़ को फेंका जा रहा है। जबकि पूर्व में वहां कूड़ा रिसाइकल कर बिजली बनाए जाने का संयंत्र लगाए जाने की बात कही गई थी। मगर कई वर्ष बीतने के बाद अभी तक जमीन तक उपलब्ध नहीं हो सकी है।

प्रदूषण की रोकथाम को लेकर दिखावटी कार्रवाई
बीते वर्ष 2016 में बाईपास रोड स्थित एक फैक्ट्री पर शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने छापेमारी की थी। मगर वहां भी सिर्फ नोटिस थमाने के बाद कार्रवाई से इतिश्री कर ली गई। इसके अलावा कुछ अन्य फैक्ट्री पर भी जांच की गई। मगर कार्रवाई शून्य ही रही।
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