झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली 142 बालिकाओं को अक्षर ज्ञान नहीं है। यह बालिकाएं अभी भी क, ख, ग नहीं जानती हैं। उनके लिए शिक्षा का अधिकार बेमानी है। परिजन की उदासीनता तथा संबंधितों की लापरवाही से इन बालिकाओं का भविष्य अभी तक अंधेरे में है।
शिक्षा पाने से वंचित इन बालिकाओं को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण ने पहल की है। पढ़े बेटी बढ़े बेटी अभियान की हकीकत उन बेटियां की हालत वयां करती है जो पढ़ने की उम्र में मां बाप के साथ काम में हाथ बंटाती नजर आती हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण ने ऐसी बेटियों की पहचान कराने के लिए पैरालीगल वालंटियर का सहारा लिया है। डोर टू डोर किए गए सर्वे के बाद 142 ऐसी बालिकाओं की पहचान की गई है जिनकी पढ़ाई की उम्र में वह शिक्षा पाने से वंचित हैं। सर्वे में ही पता चला इन परिवारों के पास कोई भी ऐसी टीम नहीं पहुंची है जो शिक्षा से वंचित इन बालिकाओं को शिक्षा दिलाने की पहल करे। शिक्षा का अधिकार क्या है इस संबंध में इन परिवारों को कोई जानकारी तक नहीं है। पैरालीगल वालंटियर की सूची को प्राधिकरण द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में भेजा जाएगा।
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बीते सत्र में मिला था प्रवेश
वर्ष 2022 में पैरालीगल वालंटियर द्वारा किए गए सर्वे में शिक्षा से वंचित 157 बालिकाओं को चिन्हित किया गया था। सर्वे के बाद इन बालिकाओं को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने को बीएसए को पत्र लिखा गया था। प्राधिकरण की पहल पर 83 बालिकाओं को प्रवेश मिला था।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत प्राधिकरण कई तरह के अभियान चलाता है। साक्षरता शिविरों के आयोजन किए जाते हैं। प्राधिकरण द्वारा शिक्षा से वंचित बालिकाओं का प्रवेश कराने की दिशा में पहल की जाएगी।
नम्रता सिंह, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण