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किसानों के खातों में नहीं पहुंचा गन्ने का भुगतान

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गन्ना लदा ट्रैक्टर। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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कासगंज। गन्ना बकाया के भुगतान से उत्साहित सैंकड़ों किसानों में अभी भी मायूसी है। काफी समय से निष्क्रिय पड़े खातों में अभी तक धनराशि नहीं पहुंच सकी है। बैंक अब किसानों से दस्तावेज मांग रही है।
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न्यौली चीनी मिल पर गन्ना किसानों का 34 करोड़ रुपया बकाया भुगतान था। भुगतान के लिए प्रदेश सरकार ने सॉफ्ट लोन योजना के तहत 35 करोड़ रुपये की धनराशि न्यौली चीनी मिल को दी। यह धनराशि किसानों के खातों पहुंचाने के लिए सीधे भारतीय स्टेट बैंक की न्यौली शाखा को उपलब्ध कराई गई। पहले न्यौली मिल के दस्तावेज अधूरे होने के कारण भुगतान नहीं हो सका। विगत सोमवार को औपचारिकता पूरी होने के बाद किसानों के खातों में धनराशि भेजने का दावा बैंक द्वारा किया गया। स्टेट बैंक न्यौली शाखा के अधिकारियों ने कृषि विकास शाखा कासगंज के जरिए भुगतान भेजा। तमाम किसानों के खातों में भुगतान भी पहुंचा, लेकिन सैंकड़ों किसानों का बकाया भुगतान नहीं पहुंचा है। इसके पीछे कारण है कि बैंक में तमाम किसानों के खातों का विवरण अपूर्ण है। कुछ किसानों के खातों में आधार कार्ड और अन्य जानकारियां लिंक नहीं हैं। इसके अलावा तमाम किसान ऐसे हैं जिनके खातों की केवाईसी नहीं हुई है। बैंक की औपचारिकता के चलते किसानों के खातों में धनराशि नहीं पहुंच पा रही है। किसान अब दस्तावेज पूरा करने में जुटे हुए हैं।
खेतों में दिख रही किसानों की मेहनत
कासगंज। तमाम किसानों का भुगतान होने के बाद मेहनत अब खेतों में दिखाई देने लगी है। खरीद केंद्रों पर लगने वाली कतारें गवाही दे रही हैं कि गन्ना कटाई तेज हो गई है। न्यौली चीनी मिल के मुख्य द्वार पर बने खरीद केंद्र पर सबसे अधिक गन्ना पहुंच रहा है। 27 केंद्रों पर चीनी मिल के वाहनों से गन्ना मंगाया जा रहा है। वहीं न्यौली मिल के खरीद केंद्र पर किसान स्वयं अपना गन्ना ले जा रहे हैं।
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आंकड़े-
- 1500 से अधिक किसानों का बकाया था भुगतान।
- 500 से अधिक किसानों के खातों में नहीं पहुंची धनराशि।
- 700 किसानों को सहायता राशि से मिला आंशिक भुगतान।
वर्जन-
- गन्ना किसानों के खातों में भुगतान पहुंच रहा है। शनिवार तक सभी किसानों के खातों में भुगतान पहुंचने की संभावना है।
ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।
- तमाम किसानों के खाते व्यवस्थित संचालित नहीं थे। किसानों ने आधार कार्ड नहीं लगाए हैं, फिर भी बैंक के माध्यम से भुगतान भेजा जा रहा है, लेकिन औपचारिकता पूरी होने के बाद ही धन आहरण हो सकेगा।
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आरके सिंह, बैंक प्रबंधक कृषि विकास शाजखा।
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