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यातायात सिग्नल हुए ‘बेजान’, अफसर अनजान, जनता है परेशान

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मैनपुरी। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए चौराहों पर लगाए गए सिग्नल तीन महीने से खराब पड़े हैं। इससे चौराहों पर यातायात व्यवस्था गड़बड़ा रही है, लेकिन जिम्मेदार अफसर अनजान बने हुए हैं।
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इन्हें सही कराने की जहमत भी नहीं उठा रहे हैं। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि एक साथ लाल, हरी और पीली सिग्नल लाइट हर समय जलती रहती है।


इससे आए दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। शहर में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जेल चौराहा, ईशन नदी तिराहा, भांवत चौराहा व करहल चौराहा पर सिग्नल लगवाए गए थे।
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सबसे पहले जेल चौराहे पर साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से सिग्नल स्थापित कराया गया था। इसका पांच साल तक रखरखाव का जिम्मा सिग्नल लगाने वाली कंपनी का ही था।


अब तक कई बार ये सिग्नल खराब हुआ, जिसे महीनों बाद सही कराया जा सका। इस बार भी जेल चौराहे का सिग्नल तीन महीने से खराब पड़ा हुआ। इस बार सिग्नल इस लिए सही नहीं कराया जा सका।


पांच वर्ष का समय पूरा हो चुका है। अब सिग्नल सही कराने के लिए कंपनी को भुगतान करना होगा। हाल यह है कि यहां लगे सिग्नल की तीनों लाइटें एक साथ जलती हैं।


इससे राहगीरों के लिए असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उन्हें समझ नहीं आता है कि वह रुके या जाएं। वहीं करहल चौराहे पर लगा सिग्नल अज्ञात वाहन की टक्कर से टूट गया था।


इसकी मरम्मत के लिए दोबारा से एस्टीमेट तैयार होना है, लेकिन अब तक पालिका ने इसके लिए कोई पहल नहीं की है।


ईशन नदी पुल पर एक साल पहले सिग्नल लगवाया गया था। तीन लाख रुपये की लागत से लगाए गए इस सिग्नल की आधी धनराशि का अब तक भुगतान भी नहीं हो सका है, जबकि सिग्नल कई महीनों से खराब पड़ा हुआ है।
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सिग्नल सही कराने के लिए कंपनी को पत्र लिखा जाएगा। करहल चौराहे के टूटे पड़े सिग्नल के लिए भी एस्टीमेट तैयार कराया जा रहा है।
राजीव सोनकर, अवर अभियंता, नगर पालिका मैनपुरी।


पहले जब ट्रैफिक सिग्नल नहीं लगे थे तो इतनी परेशान नहीं थी, लेकिन सिग्नल लगे होने के बाद भी जब सही नहीं हैं तो लोग व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं।
मुकेश कुमार


हर बार कुछ ही दिनों में सिग्नल खराब हो जाते हैं। इसके बाद फिर इन्हें सही कराने में महीनों का समय लग जाता है। इससे लोगों को परेशानी होती है।
मनोज कुमार


सिग्नल के नियमित रखरखाव की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए। अगर सिग्नल खराब होता है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर सही कराना चाहिए। राजू चौधरी


सरकारी व्यवस्थाओं का हाल कुछ ऐसा ही है। जिम्मेदार सब कुछ जानने के बाद भी अंजान बने रहते हैं। इससे आम जन को परेशानी उठानी पड़ती है।
मनीष कुमार
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