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सफेद हाथी साबित हो रहा गोकुल बैराज

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डेमो - फोटो : डेमो
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मथुरा। कई करोड़ की लागत से बना गोकुल बैराज का जल शोधन संयंत्र सफेद हाथी साबित हो रहा है। 80 एमएलडी की जल शोधन क्षमता के संयंत्र से मात्र 15 एमएलडी जल ही शोधित किया जा रहा है। कम जल शोधन का कारण जल सप्लाई के लिए पाइप लाइन और कनेक्शनों का न होना है।
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करीब दस साल पहले शहर की जल समस्या का निराकरण करने के उद्देश्य से लगाया गया गोकुल बैराज संयंत्र पूरी तरह से प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है। 80 एमएलडी जल के शोधन की क्षमता रखने वाले संयंत्र से मात्र 13 से 15 एमएलडी जल का शोधन ही किया जा रहा है।

इसका कारण अतिरिक्त जल को सप्लाई करने के लिए पाइप लाइन और कनेक्शनों का न होना है। केवल 15 एमएलडी जल सप्लाई के ही कनेक्शन नगर निगम क्षेत्र में लगाए गए हैं। इसके चलते अतिरिक्त जल का शोधन यदि बैराज संयंत्र कर भी ले तो उसकी सप्लाई नहीं की जा सकती है। नगर निगम के इंजीनियर ललित मोहन ने बताया कि यदि 80 एमएलडी जल के शोधन की आवश्यकता हुई तो गोकुल बैराज का संयंत्र इतनी मात्रा में जल को शोधित कर सकता है।
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कैसे होता है पेयजल दूषित

गोकुल बैराज से लोगों तक पहुंचने वाला पेयजल जिस समय बैराज से चलता है उस समय पीने योग्य होता है परंतु जब वह पाइप लाइनों में होता हुआ लोगों तक पहुंचता है तो एक हद तक दूषित हो जाता है। जेई ने बताया कि रास्ते में पाइप लाइन जर्जर और टूटी हुई हैं।
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