सामूहिक विवाह समारोह में फर्जीवाड़े की आशंका
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एटा। न सात फेरे और न ही मांग में सिंदूर। बस आहुतियां दीं और सरकार से प्रमाण पत्र लेकर शादी पूरी। बुधवार को जिले में हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में तमाम ऐसे नवदंपति नजर आए जिन्होंने वैवाहिक रस्मों को निभाया ही नहीं। इस दौरान तमाम वरों ने वधू को सिंदूर तक नहीं भरा। ऐसे में आयोजन के दौरान लोग चर्चा करते नजर आए कि कहीं सामूहिक विवाह के नाम पर फर्जीवाड़ा तो नहीं किया। साथ ही दंपतियों की पात्रता पर सवाल खड़े किए।
दरअसल, जिले में गुरुवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत विवाह समारोह का आयोजन जिला पंचायत परिसर में किया गया। जिले भर से 65 जोड़ों के आवेदन के बाद उनको कार्यक्रम में शामिल किया गया। मगर आयोजन के दौरान नवदंपत्तियों की पात्रता पर सवालिया निशान लग गया। समारोह के दौरान मंच से पांडित्य वर्ग मंत्रों की गूंज के साथ रस्मों को निभाने के बारे में निर्देश दे रहे थे, मगर तमाम दंपतियों ने रस्में निभाई ही नहीं। इस दौरान महज 20 दंपतियों ने फेरे लेकर वचन पूरे किए। जबकि तमाम युगल एक ही स्थान पर खड़े रहे। इसके साथ ही जब मांग भरने के लिए कहा गया, तो किसी भी युगल ने मांग भी नहीं भरी। इससे युगलों की पात्रता संदिग्ध होती नजर आई। जब दंपतियों से बात की गई, तो उन्होंने बात को टाल दिया। इससे साफ है कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए बिन सत्यापन दंपतियों को योजना का भागीदार बनाकर लाभ दे दिया गया। मामले में अधिकारियों ने भी कुछ बोलने से इनकार कर दिया है। कार्यक्रम में लोगों ने फर्जीवाड़े की आशंका जता रहे हैं।
तमाम पात्र रह गए वंचित
योजना के तहत लाभ पाने से जिले के तमाम पात्र वंचित रह गए, मगर प्रशासन ने आवेदनों की जांच किए बिना अपात्रों को लाभ बांट दिया।