फर्जी मार्कशीट लगाकर शिक्षामित्र समायोजित होकर सहायक अध्यापिका बन गई। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कराए गए प्रमाण पत्रों के सत्यापन में शिक्षिका की पोल खुल गई है। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। बीएसए ने शिक्षिका का समायोजन और नियुक्ति को निरस्त करते हुए वेतन और मानदेय वसूली के निर्देश जारी किए हैं।
मारहरा विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय नगला ढक में कार्यरत शिक्षामित्र शेषप्रभा पुत्री फेरू सिंह का समायोजन 30 मई 2015 को मारहरा के प्राथमिक विद्यालय सींय में किया गया था। सहायक अध्यापिका पर समायोजन के दौरान शिक्षामित्र ने इंटरमीडिएट की मार्कशीट और शपथ पत्र दाखिल किया। पिछले दिनों विभाग को शिक्षिका की सत्यापन आख्या यूपी बोर्ड से प्राप्त हुई। इसमें पता चला कि जो मार्कशीट शिक्षिका ने लगाई है, उसमें वह अनुत्तीर्ण है। शिक्षिका को 500 में से 186 नंबर मिले हैं। इसके बाद विभाग ने शिक्षिका को स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया। शिक्षिका ने स्पष्टीकरण में कहा कि जो सत्यापन विभाग को मिला है, वह दूसरी महिला का है। साथ ही उन्होंने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद विभाग ने शिक्षिका द्वारा समायोजन के समय दिए गए मूल अभिलेखों और सत्यापन रिपोर्ट का मिलान किया, तो शिक्षिका की बात झूठी निकली।
बीएसए ने फर्जी अंकपत्र मिलने के बाद शिक्षिका का शिक्षामित्र और सहायक अध्यापिका पद पर समायोजन अवैध पाया। बीएसए ने एबीएसए को नियुक्ति पत्र वापस लेकर रिपोर्ट दर्ज कराने और शिक्षामित्र पद का मानदेय, सहायक अध्यापिका पद का वेतन वसूल करने के निर्देश दिए हैं। बीएसए एसके तिवारी ने बताया सत्यापन रिपोर्ट और मूल अभिलेख में अलग अंक मिलने पर समायोजन निरस्त करते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।