फिरोजाबाद। करोड़ों की ठगी करने वाला गौरव शंकर यदि लालच में नहीं आता तो उसको पकड़ पाना मुश्किल था। सभी एजेंट ने तानाबाना बुन कर उसे 20 करोड़ का लालच देकर फिरोजाबाद बुलाया था। आरोपी को रिपोर्ट दर्ज होने की बात भी नहीं मालूम थी।
गौरव शंकर ने एजेंट सोमदत्त, रामचरन, ब्रजेश, राजीव जैन, प्रमोद कुमार, राकेश कुमार, निहाल सिंह, रनवीर सिंह, रुस्तम सिंह सहित करीब 50 एजेंट को एक साल में मोटी रकम बनाने के साथ ही 12 प्रतिशत की ब्याज का सपना दिखाकर जाल में फंसाया था।
उधर, एजेंट ने भी अधिक ब्याज मिलने की बात कहते हुए चिट फंड कंपनी ईडन एग्रीकल्चर रिसर्च प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड में एक हजार लोगों की एफडी करवा रखी थी। यह कंपनी मार्च 2015 में सुहागनगर में खोली गई थी।
लोगों ने एफडी और आईडी पूरी होने के साथ ही रुपये निकालने की प्रक्रिया शुरू की तो वर्ष 2016 के अगस्त में गौरव शंकर कंपनी बंद कर भाग गया। तभी से एजेंट उसकी तलाश कर रहे थे। वे लखनऊ, आगरा और आसपास के जिलों में डेरा डाले रहते थे। करोड़ों रुपये पानी में डूबने के भय से एजेंट कुछ करने से कतराते थे।
इसके बाद सभी एजेंट ने बैठक कर सोमदत्त निवासी नारायननगर थाना रामगढ़ से दक्षिण पुलिस को तहरीर दिलवा दी। साथ ही गौरव शंकर के खिलाफ 20 अगस्त 2017 को धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।उधर, होटल गर्ग से पुलिस ने जिन छह लोगों को हिरासत में लिया था। वे गौरव शंकर के शिकार हुए पीड़ित एजेंट थे।
गौरव शंकर को जानकारी नहीं थी कि उसके खिलाफ मामले में रिपोर्ट दर्ज है। एजेंट भी उससे फोन पर बात करते रहे। एजेंटों ने एक प्लानिंग के तहत गौरव शंकर को बताया कि फिरोजाबाद के कुछ उद्योगपतियों से बातचीत की गई है।
उन लोगों के साथ में काम करने के लिए तैयार भी कर लिया गया है। इसके लिए उद्योगपति करीब 20 करोड़ रुपये लगाने को तैयार हैं। इस गौरव शंकर एजेंट के झांसे में आ गया और वह 17 जुलाई की सुबह बाईपास मार्ग स्थित होटल गर्ग में अपनी कार से पहुंच गया। यहां से जेल का सफर करने के लिए रास्ता भी देख लिया।
आगरा मंडल में ठगी का जाल फैलाने के लिए गौरव शंकर ने आगरा के संजय प्लेस में कंपनी का मुख्य शाखा का आफिस भी बनाया था। यहां से फिरोजाबाद, एटा, मथुरा, मैनपुरी, कासंगज में ठगी का नेटवर्क फैलाने के लिए जाल बिछाया था।
जिले में ठगी का नेटवर्क फैलाने के लिए काम करने वाले भानू प्रताप, गौरव जैन, अमन और चिराग ने फिरोजाबाद के उन लोगों से संपर्क शुरू किया, जो पल्स, एलआईसी के साथ अन्य कंपनियों में एजेंट हैं। गौरव शंकर आगरा स्थित संजय प्लेस स्थित आफिस पर प्रति माह बैठक करता था।
जमा पूंजी पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत की ब्याज देने के साथ ही एक साल में धन दोगुना करने की भी प्लानिंग बताता था। एजेंटों को भी मोटा लाभ था। इसलिए वह भी इस फर्जी कंपनी में अपने परिचितों की आरडी और एफडी कराते चले गए। आगरा मंडल के सभी आफिस गौरव शंकर ने एक साथ बंद कर दिए। तब लोगों को खेल की जानकारी हो सकी।