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रेल लाइन तो बनी मगर मुआवजे में फंसा पेंच

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आगरा।आगरा इटावा बड़ी रेल लाइन के निर्माण के लिए रेल विभाग ने कई किसानों की जमीन अधिग्रहीत करके उन्हें मुआवजा दिया था। बाह के गांव एमनपुरा में कुछ किसानों की जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया मगर मुआवजा नहीं दिया गया। किसानों की शिकायत पर राजस्व विभाग ने जांच कराई तो मानचित्र में त्रुटियां निकलीं। अब पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। वहीं रेलवे ने मुआवजे की रकम पूर्व में ही कोषागार में जमा करा दी थी।
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बता दें, आगरा इटावा बड़ी रेल लाइन डालने के लिए वर्ष 2004 से ही किसानों की जमीन के अधिग्रहण का काम शुरू किया गया था। रेलवे के काम शुरू करने पर गयाराम पुत्र राजाराम, रामकुमार, राजेश कुमार आदि किसानों ने प्रतिवेदन दिया कि भूमि के मालिक वह लोग हैं और नक्शे में उनकी भूमि का गाटा दर्ज नहीं है। इसके बाद रेलवे ने अपने कार्यालय से पत्राचार करने के बाद गाटा संख्याओं और ले आउट में सुधार करते हुए गाटा संख्या 100 व 101 दर्शाया। चूंकि गाटा संख्या 100 नक्शे में दर्ज नहीं था तथा उसके उपयोग में आने वाली भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया था। इसलिए रेलवे ने गाटा संख्या 100 में से 0.1344 हेक्टेअर अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया की। इस प्रक्रिया में राजस्व विभाग द्वारा नए गाटाओं की संख्या दर्शाते हुए नक्शा दिया गया, जिसमें गाटा संख्या 100 और 101 चिह्नित किए गए। जांच में पाया गया कि गाटा संख्या 103 के अधिग्रहीत क्षेत्रफल से ही कुछ भूमि को गाटा संख्या 100 और 101 में दर्शाया गया। इसके बाद रेलवे ने गाटा संख्या 100 चिह्नित होने पर इस भूमि के 01344 हेक्टेअर के अधिग्रहण का पुन: भुगतान किया गया।
इसके बाद किसान अनुज किशोर ने शिकायत की कि उसकी जमीन गाटा संख्या 101 का बिना मुआवजा दिए ही रेलवे ने अधिग्रहण कर लिया है। इसके बाद राजस्व विभाग ने जांच की तो नक्शों में गड़बड़ी की बात सही पाई। नक्शों की त्रुटियों में सुधार का काम किया गया।
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इस संबंध में उत्तर मध्य रेलवे के वाणिज्य प्रबंधक/जनसंपर्क अधिकारी डा. संचित त्यागी ने बताया कि नियमानुसार जमीन अधिग्रहण का काम राज्य सरकार करती है। जितनी धनराशि जिला प्रशासन ने जमीन की बताई थी, वह 2004 में ही जमा करा दी गई थी। इसके बाद भी कुछ किसान मुआवजा मांग रहे हैं। जिला प्रशासन जांच करा रहा है।
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