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सपा-बसपा के गठबंधन से बढ़ी सियासी हलचल, बदलेंगे समीकरण

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फिरोजाबाद। वर्ष 1993 के बाद सपा और बसपा के बीच हुए चुनावी गठबंधन से जिले में भी सियासी हलचल बढ़ गई है। दोनों दलों के गठबंधन से सपा-बसपा कार्यकर्ता उत्साहित हैं। जबकि कांग्रेस और भाजपा ने इसे मजबूरी करार दिया है। गठबंधन का असर तो चुनाव के नतीजे बताएंगे, लेकिन गठबंधन में फिरोजाबाद की सीट सपा के खाते में है।
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बसपा यहां से अभी तक लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाई है, जबकि सपा ने चार बार यह सीट जीत कर दिल्ली तक साइकिल दौड़ाई है। सपा-बसपा का चुनावी गठजोड़ जिले में सियासी नजरिये से काफी अहम माना जा रहा है। वर्तमान में यहां से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव सांसद हैं।

2019 का लोकसभा चुनाव भी अक्षय ही लडे़ंगे, यह तय हो चुका है। इसलिए गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में है। सपा के सामने 2014 से काफी इतर हालात हैं। तब सूबे में सपा की सरकार भी थी और सैफई परिवार एकजुट था। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सैफई परिवार में बिखराव के साथ जिले में भी सपा के कई प्रमुख नेता पार्टी से किनारा कर गए। बदले हालातों की चुनौती के बीच सपा को बसपा का साथ राहत दे सकता है।
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फिरोजाबाद लोकसभा सीट सपा चार बार जीत चुकी है। 1999 के लोकसभा चुनाव में रामजीलाल सुमन सपा से चुनाव जीते थे। 2004 में भी सुमन जीतकर लोकसभा पहुंचे। तब फिरोजाबाद सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी और आगरा की बाह और फतेहाबाद विधानसभा भी फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में शामिल थीं।

जिले की जसराना विधानसभा मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र और टूंडला विधानसभा जलेसर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करती थी। फिरोजाबाद और शिकोहाबाद विधानसभा के साथ आगरा की बाह और फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र को मिला कर फिरोजाबाद लोकसभा का परिसीमन था।

2009 के आम चुनाव में लोकसभा का परिसीमन बदल गया और जिले की पांच विधानसभाओं को मिला कर फिरोजाबाद संसदीय सीट को नया रूप मिला। नए परसीमन में यह सीट सामान्य श्रेणी में आ गई। 2009 का आम चुनाव यहां से सपा से अखिलेश यादव ने जीता।

2009 में अखिलेश कन्नौज से भी जीते थे, लिहाजा उन्होंने फिरोजाबाद सीट से इस्तीफा दे दिया था। 2009 में ही उप चुनाव हुआ, जिसमें अखिलेश यादव ने अपनी जीती हुई सीट पर फिर दांव लगाया और पत्नी डिंपल यादव को चुनाव लड़ाया। डिंपल यादव उप चुनाव हार गईं और कांग्रेस से फिल्म अभिनेता राज बब्बर चुनाव जीत गए। 2014 के चुनाव में सपा से अक्षय यादव सांसद चुने गए।

रामलहर में प्रभुदयाल कठेरिया ने बनाई थी हैट्रिक
राम मंदिर आंदोलन के बाद राम लहर में जिले में भाजपा ने हैट्रिक बनाई थी। 1991 में यहां से प्रभु दयाल कठेरिया भाजपा की टिकट पर पहली बार चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंचे। 1996 का चुनाव भी वही जीते और 1998 में हुए उप चुनाव में भी जीत हासिल कर उन्होंने हैट्रिक बनाई थी।
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