फिरोजाबाद। एनजीटी में क्षमता विस्तार को लेकर सेफ संस्था एवं एक अन्य औद्योगिक संगठन के दाखिल मामले को एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है।
सुहागनगरी के कांच उद्योग के खिलाफ बाहरी औद्योगिक संगठन की लगातार शिकायतें की जाती रही हैं। नई दिल्ली की सेफ संस्था ने फिरोजाबाद के कांच उद्योग से बढ़ते प्रदूषण, बिना अनुमति इकाइयों के संचालन, अफसरों के गलत तरीके से इकाइयों को संचालन की अनुमति देने से सहित कई बिंदुओं पर 143 इकाइयों के खिलाफ एनजीटी में रिट दायर की थी। अब तक कई बार सुनवाई हो चुकी है।
इसके साथ ही एक अन्य औद्योगिक संस्था नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ने फिरोजाबाद में कांच इकाइयों के विस्तार को अनुमति देने तथा टीटीजेड की सीमाओं के पुन: चिन्हांकन को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को राज्य सरकार के पाले में डाल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला संबंधित उद्योग विभाग के स्तर का है इसका संज्ञान संबंधित विभाग (उद्योग सचिव) ही लें।
एनजीटी में दायर की गई याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई तब फिरोजाबाद के उद्योगपतियों की तरफ से मामले की पैरवी अधिवक्ता श्वेता शर्मा ने की। बताया कि एनजीटी ने क्षमता विस्तार के संबंध में सेफ के दाखिल प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है।
एनजीटी के फैसले का उद्योगपतियों ने स्वागत किया। प्रमुख निर्यातक मुकेश बंसल टोनी ने कहा कि एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट एक साजिश के तहत दूसरे जिलों के बडे़ उद्योगपतियों के इशारे पर शहर के कांच उद्योग को तबाह करने के लिए याचिका दाखिल की थी।
उद्योगपति संजय अग्रवाल ने कहा कि एनजीटी की शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद केस का निस्तारण कर दिया है। इससे कांच उद्योग पर लगाए गलत आरोप खारिज हो गए हैं। उद्योगपति राजकुमार मित्तल का कहना है कि एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देकर रिट को खारिज कर दिया है इससे कांच उद्योग को राहत मिली है।