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मार्कंडेय की तपोभूमि पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

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मैनपुरी/घिरोर। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर जनपद के तीर्थस्थल मार्कंडेय पर लक्खी मेले का शुक्रवार से शुभारंभ हो गया। मेले के प्रथम दिन हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मार्कंडेय के पवित्र सरोवर में श्रद्धा की डुबकी लगाई। घिरोर के विधूना स्थित महर्षि मार्कंडेय को सभी तीर्थों का मान्य माना गया है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा से यहां एक पखवाड़े तक चलने वाले मेले का आयोजन होता है।
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शुक्रवार को मध्य रात्रि से ही यहां कार्तिक पूर्णिमा का स्नान शुरू हो गया। प्रदेश भर से यहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने मार्कंडेय ऋषि के मुख्य मंदिर के सम्मुख स्थित पवित्र सरोवर में श्रद्धा की डुबकी लगाई। मार्कंडेय ऋषि के मंदिर पर माथा टेक मनौती मांगी। भक्तों ने पास में ही स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर में भी पूजा अर्चना की।

पांडवों के चबूतरों के आज भी हैं अवशेष
मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि विधूना का संबंध महाभारत काल से भी बताया जा रहा है। बताया जाता है कि महाभारत काल के विधुर का यहीं टीला था। उनके नाम से ही इस गांव का नाम विधूना पड़ा। बताते हैं कि पांडवों ने अज्ञातवास के दिन भी यहीं व्यतीत किए थे। पांडवों के चबूतरों के अवशेष भी यहां मिलते हैं।
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भंडारे का हुआ आयोजन
मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि पर संतों का अखाड़ा भी शुरू हो गया। यहां पहुंचे लोगों ने संतों को भोजन कराया। संत यहां अपनी धूमि रचा रहे हैं। दिनरात भजन कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
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लोगों को खूब पसंद आईं लाठी
मार्कंडेय मेले में पहुंचे लोगों को लाठी खूब भाई। यहां की परंपरा है कि क्षेत्रीय लोग मेले से लाठी जरूर खरीदकर ले जाते हैं। शुक्रवार को पूर्णिमा के दिन मेले में लाठी की खूब बिक्री हुई। लोगों ने बड़ी संख्या में लाठी खरीदीं।
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