मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर रात्रि में जानकी जन्म, ताड़का वध व अहिल्या उद्धार का प्रभावशाली व हृदयस्पर्शी मंचन किया गया। इससे पूर्व शाम चार बजे मुनि विश्वामित्र के साथ राम, लक्ष्मण की सवारी जन्मस्थान से प्रारंभ होकर डीग गेट, चौक बाजार, होती हुई राजाधिराज बाजार पहुंची। वहां श्रीराम के द्वारा ताड़का वध की लीला सम्पन्न हुई।
रात्रि मंचन में मिथिला (जनकपुर) में वर्षा न होने से अकाल की स्थिति हो गई है। शतानन्द व गर्गाचार्य आदि ऋषियों की सलाह पर राजा जनक व महारानी सुनयना द्वारा कराए गए अनुष्ठान के तहत जानकी जी अनादि पराशक्ति के रूप में प्रकट होती हैं। दूसरी ओर राक्षसों से दुखी विश्वामित्र अवध नरेश दशरथ के यहां पहुंचे। राम व लक्ष्मण को ले जाने का संवाद हुआ। मार्ग में ताड़का वध लीला हुई।
आश्रम में मुनि विश्वामित्र ने श्रीराम को संग्रहित शस्त्र विद्या का ज्ञान, बला, अतिबला के मंत्र व शस्त्र समर्पित किए। सोमवार को शाम सात बजे लीलामंच पर गौरी पूजन व पुष्प वाटिका की लीला होगी। इस मौके पर प्रसाद व्यवस्था कैलाश चंद्र व सौरभ मित्तल सराफ ने की।
गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, रविकांत गर्ग, गौरशरण सराफ, सभापति जयंती प्रसाद अग्रवाल, उपसभापति जुगलकिशोर अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, प्रधानमंत्री मूलचंद गर्ग, उपप्रधानमंत्री प्रदीप कुमार सराफ, विजय कुमार सराफ, शैैलेश अग्रवाल सराफ, पं. शशांक पाठक, विनोद अग्रवाल, संजय बिजली, अमित भारद्वाज, शैैलू हकीम आदि मौजूद रहे। व्यवस्था में मोहन लाल कंठी वाले, हिमांशु सूतिया, मोहित अग्रवाल आदि रहे।