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प्रयोगशाला देखी नहीं, कैसे करेंगे प्रैक्टिकल

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प्रयोग करते विद्यार्थी। - फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। माध्यमिक शिक्षा परिषद के कालेजों में शिक्षा का बुरा हाल है। परिषद द्वारा 15 दिसंबर से प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराई जानी हैं, लेकिन कोई तैयारी नहीं है। कई कालेजों के इंटरमीडिएट के छात्रों ने तो लैब देखी तक नहीं है।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश की वार्षिक परीक्षाएं छह फरवरी से शुरू होने के लिए जा रही हैं। परीक्षाओं से पहले प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराई जानी हैं। जिसकी तिथि परिषद द्वारा 15 दिसंबर घोषित की गई। लेकिन कालेजों में प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए अभी तक कोई तैयारी नहीं है। गांव के कालेजों की तो बात छोड़ो शहर के कालेजों का भी हाल सही नहीं है।

एसएस शिक्षण संस्थान नगला पीपल के 12वीं के छात्र सनोज कुमार का कहना है कि उसने दो साल में प्रयोगशाला नहीं देखी। प्रयोगशाला में उसे एक भी प्रयोग नहीं सिखाया गया। यदि परीक्षक ने उसे प्रैक्टिकल के लिए प्रयोगशाला में खड़ा कर दिया तो वह कैसे कुछ कर पाएगा।
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सत्गुरु महंत इंटर कालेज नगला मंडल के 12वीं के छात्र विनय कुमार ने बताया कि प्रयोगात्मक परीक्षाओं के नाम पर अभी तक फाइनल तक तैयार नहीं कराई गई हैं। ऐसे में किस प्रकार से वह प्रयोगात्मक परीक्षाओं में शामिल होगा उसे खुद नहीं मालूम। यदि परीक्षक की कृपा नहीं हुई तो उसका प्रयोगात्मक परीक्षा में पास होना भी मुश्किल हो जाएगा।

डीएवी इंटर कालेज के 12वीं के छात्र समीर वारसी का कहना था कि प्रैक्टिकल की तिथि तो घोषित हो गई है लेकिन कालेज में अभी तक कोई तैयारी नहीं है। एक भी दिन उसे व उसके साथियों को प्रैक्टिकल के लिए प्रयोगशाला में नहीं ले जाया गया है।

जनपद में पिछली प्रयोगात्मक परीक्षा के दौरान देखने को मिला था कि प्रति प्रैक्टिकल 500 से 1000 रुपये तक छात्र-छात्राओं से वसूले गए थे। ऐसा ही कुछ इस वर्ष भी होने की संभावना है। कालेज संचालक परीक्षकों के नाम आने की जानकारी जुटा रहे हैं। पिछली प्रयोगात्मक परीक्षा में इस प्रकार की शिकायतें अधिकारियों के पास पहुंची थीं।

डीआईओएस ने बताया कि प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं। पूर्व में लगातार निरीक्षण कर प्रयोगशालाओं को दुरुस्त करने तथा प्रैक्टिकल कराने के निर्देश प्रधानाचार्यों को दिए गए थे। अब यदि लापरवाही मिलती है तो संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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