खेल के मैदान से खेत की माप नारियों के हाथ
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एटा। खेल का मैदान हो या खेत की माप। देश सेवा के लिए भी वो आगे हैं और जनता की सुरक्षा में भी। समाज सुधार की बात हो या घर को संभालने की, हर मोर्चे पर महिलाएं डटकर खड़ी हुई हैं। जिले की महिलाओं ने भी हर क्षेत्र में अपना दबदबा कायम किया है। जनगणना के आंकड़ों में भले ही महिलाएं साक्षरता और लिंगानुपात में पिछड़ी हों, लेकिन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का जज्बा उनमें है। कहने को तो पिछड़े जिले में महिलाओं के अधिकारों को लेकर इतनी जागरूकता नहीं नजर आती, लेकिन समानता के अधिकार को नारी शक्ति ने जमकर बुलंद किया है। ऐसे में आज महिला समानता दिवस के मौके पर जिले की नारी शक्ति को याद करना लाजिमी है।
लेखपाल बन बेटी ने बढ़ाया मान
जिले के शिव सिंहपुर निवासी राज मिस्त्री महाराज सिंह की बेटी रूबी ने लेखपाल बनकर जिले का मान बढ़ाया है। लेखपाल की नौकरी में आधी आबादी ने भी दबदबा कायम किया। रूबी के साथ जिले में छह बेटियों ने लेखपाल के पद पर चयन पाया है।
एसएससी में चमकी पूनम
जिले की पूनम ने भी कर्मचारी चयन आयोग की स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करके नई इबारत कायम की है। उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद हौसले और हुनर के दम पर ये कामयाबी पाई है। गांव भजुआ निवासी खुशबू की काबिलियत पर हर किसी को गर्व है।
खुशबू के सपनों ने लगाई छलांग
कूद प्रतियोगिताओं और खो-खो में तीन बार राष्ट्रीय खेलों में प्रतिभाग करने वाली खुशबू वर्मा ने भी जिले का नाम रोशन किया है। पिता श्रीपाल सिंह की मौत के बाद भी खुशबू ने आंध्र प्रदेश से लेकर दिल्ली तक अपनी प्रतिभा का परचम फहराया है।
कीर्ति ने फहराई यश पताका
गांव शिवसिंहपुर निवासी कीर्ति वर्मा ने आल इंडिया विवि खेलों तक अपनी धाक जमाई है। 10 किमी क्रास कंट्री दौड़ में प्रदेश स्तर पर गोल्ड मेडल पाने वाली कीर्ति किसान रूप सिंह की बेटी है।
यह है आंकड़ों का सच
कहने को तो महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं, लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो हकीकत बिल्कुल जुदा है। लिंगानुपात के मामले में जिले में एक हजार पुरुषों पर 873 महिलाएं हैं। जबकि महिला साक्षरता दर 58.80 फीसद है। ऐसे में आंकड़ों में महिलाओं में जागरूकता की जरूरत है।