मैनपुरी। गोरखपुर में आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत की घटना के बाद भी जिला प्रशासन नहीं चेत रहा है। जिला अस्पताल को खुद फंड की आक्सीजन की जरूरत है। ताकि यहां आए गंभीर मरीजों का सुचारु रूप से उपचार हो सके। वर्तमान में जिला अस्पताल में कहीं आक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। तो कहीं मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं।
आलम यह है कि जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में एसी दूर कूलर तक की व्यवस्था नहीं है। शनिवार को जब अमर उजाला की टीम ने मरीजों से जानकारी ली। तो मरीजों ने सुविधाओं के नाम मिलने वाली तकलीफ का हाल ए जिक्र बयां किया।
उल्लेखनीय है कि गोरखपुर में आक्सीजन की कमी से कई बच्चों की मौत हो चुकी है।
मैनपुरी के जिला अस्पताल में भी न तो दवाओं के लिए पैसा है और न ही आक्सीजन सिलेंडर मंगाने के लिए। अस्पताल में दिल्ली की फर्म से ड्राफ्ट भेजकर आक्सीजन सिलेंडर मंगाए जाते हैं। इसके लिए शासन से काफी समय से फंड नहीं आया है। अस्पताल के खर्चों में से जुगाड़ कर आक्सीजन मंगाई जाती है।
सीएमएस एके उपाध्याय की मानें तो जब अस्पताल के पास पर्याप्त पैसा न होने पर एक वेंडर के माध्यम से ऊधार में आक्सीजन सिलेंडर मंगाए जाते हैं। इस बार पैसा न होने के चलते उक्त वेंडर से उधार में सिलेंडर मंगाए गए हैं।
वहीं शनिवार को जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में एक भी आक्सीजन सिलेंडर नहीं था। बताया गया कि मरीज ही नहीं हैं। मरीज होते हैं तो जनरल वार्ड से आक्सीजन सिलेंडर मंगाया जाता है।
इसके अलावा बर्न वार्ड में न तो आक्सीजन सिलेंडर नजर आए न हीं आग बुझाने का यंत्र ही लगा मिला। वहीं इमरजेंसी वार्ड में आक्सीजन की सप्लाई पाइप लाइन के जरिए की जा रही है। मगर वहां भर्ती किसी भी मरीज के आक्सीजन नहीं लगी थी। आग बुझाने के यंत्र भी करीब सही सलामत थे।
मगर मरीजों की समस्या बिजली न आना, कई दवाएं बाहर से मंगाने आदि की थीं। वहीं जरनल वार्ड में बैड के नजदीक लगी पाइप लाइन से आक्सीजन देेने की व्यवस्था है। लेकिन यह सभी उपकरण कार्यरत नहींम हैं। यहां आक्सीजन आपूर्ति के लिए बने कमरे में ताला लटका हुआ था।
मौके पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। ऐसे में यदि किसी को आक्सजीन की जरूरत पड़ जाए तो उसका भगवान ही मालिक है। वहीं इसरजेंसी में जरूर छह सिलेंडर आक्सीजन के भरे हुए रखे थे। हालांकि वहां तैनात कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन पांच से नौ सिलेंडर तक की जरूरत इमरजेंसी में पड़ती है। इसके अलावा यदि जरूरत पड़ती है तो कंपनी को फोन कर तत्काल सिलेंडर मंगा लिए जाते हैं।
वहीं अस्पताल में सुरक्षा मानक भी पूरे नहीं हैं। हालांकि जगह जगह अग्नि शमन उपकरण लगे हैं लेकिन इतने बड़े अस्पताल में यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे।