आगरा। जलकल विभाग में 13 वें वित्त आयोग की राशि से केवल विकास कार्य में ही घपला नहीं हुआ बल्कि उपकरण और सीवर के मैनहोल कवर की खरीद में गोलमाल किया गया है। अधिकारियों की मनमानी का आलम यह रहा कि मैनहोल का जो ढक्कन नगर निगम ने करीब 1900 रुपये प्रति नग में खरीदा, वैसे ही ढक्कन के लिए जलकल विभाग ने गाजियाबाद की फर्म को 3000 रुपये प्रति नग का भुगतान किया।
पार्षदों की ओर से इस मामले की जांच कर रहे अपर आयुक्त आरपी सिंह को साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं। पार्षदों का कहना है कि आरसीसी मैनहोल कवर की खरीद 08 मार्च 2016 को की। उन्होंने 1000 मैनहोल कवर 560 एमएम के खरीदे और 1000 मैनहोल कवर 600 एमएम के खरीदे गए। गाजियाबाद की फर्म मेसर्स ईको इंडस्ट्रियल सर्विस को 560 एमएन के मैनहोल कवर के लिए 30 लाख 75 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इस आधार पर एक नग मैनहोल के लिए करीब 3075 रुपये का भुगतान किया गया। इसी तरह 600 एमएम के मैनहोल के लिए 34 लाख रुपये का भुगतान किया।
एक ढक्कन करीब 3400 रुपये का पड़ा। हैरत की बात यह है कि 2014 में नगर निगम 600 एमएम के मैनहोल कवर मय फ्रेम के मथुरा की जिंदल कंकरीट फर्म से प्रति नग 1901 रुपये में और 650 एमएम के मैनहोल कवर प्रति नग 2050 रुपये में खरीदे हैं।
इसके बाद इसी फर्म ने 2015-16 में पुरानी दरों पर मैनहोल कवर सप्लाई की सहमति दी थी। अब सवाल उठता है कि जब मथुरा की फर्म सस्ती दरों पर मैनहोल कवर की सप्लाई कर सकती थी तो गाजियाबाद की फर्म से मैनहोल क्यों खरीदे गए? यही नहीं जलकल विभाग ने तीन बार में इसी फर्म से करीब 5000 मैनहोल खरीदे हैं।
ठेकेदार की रेट पर दिया निर्माण कार्य का ठेका
जलकल विभाग ने निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले भुगतान ही नहीं बल्कि ठेका भी ठेकेदार की रेट पर दिया। उदाहरण के रूप में नाला पुल छिंगा मोदी में 160 एमएम की 900 मीटर पीवीसी पाइप लाइन डालने की आरक्षित दर 6.62 रखी थी और मेसर्स आरएसएस इंफ्राबिल्ड इंडिया लिमिटेड को 6.48 रुपये की दर से टेंडर दिया गया। इसी तरह तहसील रोड पर 600 मीटर पाइप डालने की निविदा की दर 4.80 थी और 4.70 में टेंडर आवंटित हुआ। करकुंज आवास विकास में 550 मीटर सीवर लाइन डालने का आरक्षित मूल्य 55 रुपये रखा गया था और 54.58 रुपये टेंडर जारी कर दिया गया। जबकि नगर निगम ने नवल किशोर हास्पिटल चौराहे से आरबीएस कालेज तक सीवर लाइन डालने का काम 20 प्रतिशत कम रेट पर कराया।