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दरगाहे अबरारिया पर हुई कुल शरीफ की फातिहा

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फिरोजाबाद। दरगाहे अबरारिया पर रविवार को सुबह कुरानख्वानी के साथ कुल शरीफ की फातिहा हुई, जिसमें दरगाहे अबरारिया पर हजरत सूफी सैय्यद अबरार हसन शाह जाने औलिया सरकार के सैकड़ों मुरीद एकत्रित हुए। सज्जादा नसीन व मुतवल्ली सूफी सैय्यद अंसार हुसैन शाह ने देश में अमन चैन की दुआ मांगते हुए कहा कि सूफीज्म में इंसानियत को ही सर्वोपरि माना जाता है।

सूफीज्म ही इंसान को इंसान से प्यार करना सिखाता है। सच्चा सूफी कभी इंसानों में भेदभाव नहीं करता। दुनियां में सिर्फ दरगाहें ही ऐसी जगह हैं, जहां पर सभी मजहब के लोग बिना किसी भेदभाव के शरीक होते हैं।
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फतिहा के बाद रंग हुआ, जिसमें सभी कव्वालों ने एकसाथ मिलकर रंग पढ़ा- आज रंग है हे मा रंग है री ख्वाजा अबरार पिया के घर रंग है री।

जब रंग पढ़ा जा रहा था, तब सभी मुरीदेन और श्रद्धालु अश्रुपूरित निगाहों से जिक्रे धमाल कर रहे थे। वह अपने पीर की याद में भावविभोर हो रहे थे। दरगाह पर चादर चढ़ाने का सिलसिला दिनभर जारी रहा। सपा एमएलसी डा. असीम यादव ने चादर पेश की। सैकड़ों लोगों ने दरगाह पर हाजिरी देकर चादर पेश की।


रात में महफिले-ए-समा का आयोजन हुआ, जिसमें कव्वालों ने अपने कलाम पेश किए। सगीर बीसलपुरी ने पढ़ा तेरा दर मिला गया मुझको सहारा हो तो ऐसा हो। अनवर हुसैन ने पढ़ा एक सूरत की दो मुर्तियां ख्वाजा हसन औलिया अबरार हसन औलिया। दरगाह पर नायब सज्जादा सूफी जमील नासिर अबरारी की देखरेख में लंगर का वितरण हुआ।
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मौके पर सूफी इजहार, सूफी नफीस, अशोक कुमार, अनूपचंद्र जैन, जितेंद्र सिंह यादव, मंजय यादव, ब्रजकिशोर शर्मा, अतुल अग्रवाल, अकील पूर्व सभासद, केशवदेव, देशदीपक यादव, महबूब अजीज, असलम परवेज आदि मौजूद रहे।
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