एटा। पिछले साढ़े चार साल में स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर जिले में जो खेल हुए, वह बयां कर रहे हैं कि यह अभियान जिस उद्देश्य से शुरू हुआ था। वहां तक नहीं पहुंच सका। बात चाहें शौचालय की हो या इस योजना के तहत हुए अन्य कार्यों की। जनपद में हर बार उन पर सवाल खड़े हुए हैं। कइयों पर कार्रवाई हुई तो कुछ जिम्मेदारों को फटकार का सामना भी करना पड़ा। इसके बाद भी योजना को अंजाम तक पहुंचाने वाले लोग खेल करने से नहीं चूक रहे हैं।
अब एक बार फिर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से घोटाले की ‘बू’ आ रही है। इस बार जिम्मेदारों ने घोटाले का हथियार कूड़ेदान को बनाया है। पंचायती राज विभाग की ओर से जिस कूड़ेदान को लगवाया जा रहा है। उस कूड़ेदान की बाजार में कीमत महज तीन हजार रुपये ही आंकी गई है, जबकि विभाग की ओर से उस कूड़ेदान सेट के 15 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। इस बार बड़ी बात यह कि सवाल खड़े करने वाले कोई और नहीं जिला प्रशासन के अपने ही हैं। पंचायत सचिवों ने कूड़ेदान की खरीद पर सवाल खड़े करते हुए डीपीआरओ को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि उन्होंने अपनी चहेती फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए कूड़ेदान की खरीद कराई है।
15458 रुपये किए जा रहे वसूल
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में दो-दो कूड़ेदान लगाए जाने हैं। इसके लिए ग्राम पंचायतों को जिला पंचायत राज विभाग से कूड़ेदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान भेज भी दिए गए हैं। ग्राम पंचायतों को कुटेशन के फार्म भी दिए गए हैं। इसमें कूड़ेदान की कीमत 15458 रुपये है। अब पंचायत सचिवों से इनके भुगतान के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है।
कूड़ेदान कहां से आए, नहीं बताएंगे
जिन कूड़ेदान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं आखिर वह कूड़ेदान किस फर्म से लिए गए हैं। यह बताने को कोई तैयार नहीं है। पंचायत सचिवों ने तो डीपीआरओ पर ही आरोप लगाए हैं कि उन्होंने अपने किसी चहेते की फर्म से कूड़ेदान उपलब्ध कराए हैं। इस मामले में जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
स्वच्छता में सहयोगी बन पाएंगे कूड़ेदान?
जिले की 576 ग्राम पंचायतों में दो-दो कूड़ेदान भेजे जा रहे हैं। मगर कूड़ेदानों का हर गांव में सहयोगी बन पाना टेड़ी खीर है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 576 ग्राम पंचायतों से 853 राजस्व गांव जुड़े हैं और हर ग्राम पंचायत में कम से तीन से चार गांव शामिल हैं। अगर एक ग्राम पंचायत में दो कूड़ेदान भेजे जाएंगे, तो बाकी गांवों में स्वच्छता का क्या होगा?
उठ रहे तमाम सवाल
मामले को लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। पहला तो गांवों में कूड़ेदान पहुंचाने वाली फर्म के बारे में किसी को जानकारी नहीं है। साथ ही कोई कुटेशन और टेंडर प्रक्रिया नहीं हुई है। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर से कूड़ेदान खरीदे जाने हैं, तो जिला स्तर से प्रक्रिया को अंजाम क्यों दिया जा रहा है? यह कारण है कि मामले में बड़े खेल नजर आ रहा है।