कासगंज।
गंगा श्रद्धालुओं की असीम श्रद्धा का केंद्र है। जिले में गंगा स्नान के लिए गृह राज्य एवं बाहरी राज्यों के श्रद्धालु पहुंचते हैं। लहरा, कछला और कादरगंज गंगाघाट पर तो प्रतिदिन ही श्रद्धालुओं का डेरा रहता है। कई स्नान पर्व पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। बावजूद इसके सरकारें श्रद्धालुओं की पक्के गंगाघाट बनाने की मांग पर मौन हैं।
जिले में लहरा और कदरगंज गंगाघाट आते हैं। जबकि कछला गंगाघाट पर जिले की सीमा खत्म होती है। इससे कछला का गंगाघाट बदायूं प्रशासन के अधीन है। इन तीनों ही स्थानों पर घाट कच्चे हैं। जबकि श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ विशेष पर्वों पर यहां उमड़ती है। लहरा गंगाघाट पर शिवरात्रि का कांवड़ मेला के लिए गंगाजल लेने शिव भक्त पहुंचते हैं। कावड़ मेले के दौरान भी कई बार कांवड़ियों के डूबने के हादसे हो हुए हैं, लेकिन इन हादसों से भी शासन प्रशासन ने सबक नहीं लिया।
कछला गंगाघाट पर भी सर्वाधिक हादसे होते हैं। यहां कई बार गंगा में नाव पलटने की घटनाएं हुईं हैं। वहीं स्नान पर्वों पर श्रद्धालु पक्का घाट न होने के कारण जहां तहां स्नान करने को मजबूर हो जाते हैं और गंगा की तलहटी के गढ्डों में डूब जाते हैं। गंगाघाटों पर पक्के घाट न होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां तक की टॉयलेट तक को श्रद्धालु परेशान होते हैं।
- गंगा पर पक्के घाट बनाए जाने चाहिए। सोरों आने वाले श्रद्धालु पहले हर की पौड़ी पर स्नान करते हैं बाद में लहरा गंगाघाट पर जाते हैं, लेकिन पक्के घाट न होने के कारण लोगों को दिक्कते होती हैं। डा. राधाकृष्ण दीक्षित
- गंगाघाट पक्के होने चाहिए। इस क्षेत्र का अपना अलग धार्मिक महत्व है। सरकार, शासन और प्रशासन पक्के घाट बनाने पर ध्यान नहीं देता। जबकि आए दिन श्रद्धालु डूबने की घटनाओं का शिकार होते हैं। उपेंद्र मिश्रा, एडवोकेट