मैनपुरी। घिरोर ब्लाक के 86 सदस्यों में से 25 सदस्य कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जज के सामने पेश हुए। ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान के बाद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला जज ने बीडीसी सदस्यों से मतदान के समय किए गए हस्ताक्षर तथा कार्रवाई की पुष्टि की। सुरक्षा के लिहाज से कोर्ट के बाहर पुलिस और पीएसी के जवान पूरे समय मौजूद रहे।
घिरोर ब्लाक प्रमुख सरिता यादव के खिलाफ 63 बीडीसी सदस्यों ने बीडीसी सदस्य सत्यपाल सिंह यादव के नेतृत्व में नौ अगस्त को शपथपत्रों सहित प्रार्थनापत्र देकर अविश्वास जताते हुए क्षेत्र पंचायत समिति की बैठक बुलाने की मांग की थी।
तत्कालीन डीएम यशवंत राव ने बैठक बुलाने तथा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने के लिए चार सितंबर की तिथि निर्धारित की। बीडीसी सदस्यों को जबरन उठाने के आरोप में दोनों पक्षों के बीच घिरोर क्षेत्र में फायरिंग भी हुई।
एक दलित बीडीसी सदस्य ने ब्लाक प्रमुख के पति सहित उनके साथियों पर अपहरण के प्रयास का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी। दूसरे पक्ष ने भी बीडीसी सदस्यों का अपहरण करने की शिकायत की। चार सितंबर को हुए मतदान में क्षेत्र पंचायत समिति के 86 सदस्यों में से 63 सदस्यों ने ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास जताते हुए मतदान किया।
मतदान प्रक्रिया में धांधली बरते जाने का आरोप लगाते हुए ब्लाक प्रमुख ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए आदेश के खिलाफ ब्लाक प्रमुख सरिता यादव ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करके मतदान प्रक्रिया को चुनौती दी।
सर्वोच्च न्यायालय ने जिला जज के न्यायालय में 14 दिसंबर को सभी बीडीसी सदस्यों की मौजूदगी में उनके हस्ताक्षर, पहचान, मतदान प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए। गुरुवार को ब्लाक क्षेत्र पंचायत के 86 सदस्य कड़ी सुरक्षा में जिला जज नंदलाल के न्यायालय में पहुंचे। जिला जज ने बीडीसी सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में बुलाकर उनकी पहचान, हस्ताक्षर, मतदान प्रक्रिया के संबंध में की गई कार्रवाई की पुष्टि की। न्यायालय के बाहर सुरक्षा के लिहाज से महिला पुलिस और पीएसी के जवान मौजूद रहे।
घिरोर ब्लाक का बीडीसी सदस्य श्रीनिवास उर्फ पौपी यादव निवासी शाहजहांपुर थाना घिरोर जेल में बंद है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उसको कड़ी सुरक्षा के बीच दीवानी न्यायालय लाया गया। न्यायालय के कर्मचारियों ने बीडीसी सदस्य को लाने वाले पुलिसकर्मियों से बारी का इंतजार करने को कहा।
जिला जज ने न्यायालय में हर बीडीसी सदस्य को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में बुलाकर सवाल पूछे। बीडीसी सदस्य का नाम, पता जानने के बाद उसका पहचान पत्र तथा बीडीसी सदस्य का प्रमाणपत्र देखा। मतदान प्रक्रिया के दौरान मतपत्र पर सदस्य द्वारा किए गए हस्ताक्षर की पुष्टि सदस्य से ही कराई। मतदान करने का समय भी सदस्य से पूछा गया।