आगरा। कंस के अत्याचारों की पराकाष्ठा हो गई। गो माता बिलखने लगी। धरती माता कंस के पापों का बोझ उठाने में असमर्थ हो गई। संतजन परेशान होने लगे। तब सबने मिलकर परमपिता परमात्मा से प्रार्थना की। ‘ओ पालन हारे, निर्गुण ओ न्यारे, तुम बिन हमरा कोन्हों नाही’ भक्तों की करुण पुकार सुनकर भक्त वत्सल भगवान विष्णु ने भादों की काली रात में अवतार लिया। कान्हा के अवतरण के साथ ही अंधकार मिट गया, प्रकृति ने खिलखिलाना शुरू कर दिया और मन प्रफुल्लित होने लगे और वातावरण में देवकी सुत, यशोदा के लाल के जयकारे गूंजने लगे।
जी हां! कृष्ण जन्माष्टमी पर मंगलवार को शहर का ऐसा ही नजारा था। दिन भर मंदिरों में तारणहार की प्रतीक्षा में अखंड रामचरितमानस पाठ, भजन, कीर्तन के दौर चलते रहे। रात में जैसे ही 12 बजे शंख की ध्वनि गूंजने लगी। घंटे, घड़ियाल बजने लगे। चारों को कन्हैया का जयघोष होने लगा। लड्डू गोपाल को पंचगव्य से स्नान कराया गया। सजीले वस्त्र धारण कराकर दिव्य श्रंगार किया गया। इसके बाद भगवान को धनिए से बनी पंजीरी, माखन, मिसरी, फल और पाग का भोग लगाया गया।
लोग नृृत्य करने लगे। हर कोई कृष्ण की भक्ति में सराबोर होकर जूझ रहा था। नंद के आनंद भये जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की... का शोर जारों गुंजायमान हो गया। लाला को सुंदर पालने में बिठाया गया और हर कोई उन्हें झोटा देने की लालायित था। अद्भुत छवि का निहार कर लोग निहाल हो रहे थे। देर रात तक मंदिरों में आस्था का समुद्र उमड़ता रहा।
राधाकृष्ण मंदिर लायर्स कालोनी, लक्ष्मी नारायण मंदिर केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड, राधा कृष्ण मंदिर नेहरू नगर, राधा कृष्ण मंदिर विजय नगर, द्वारिकाधीश मंदिर, श्याम जी मंदिर, मनकामेश्वर, चामुंडा देवी मंदिर धाकरान, एमजी रोड, लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर आदि में देर रात तक भक्तों की भीड़ रही।