जिले से आलू को दूसरे प्रदेशों में भेजने का काम शुरू हो गया है। बीते एक सप्ताह में 12 हजार मीट्रिक टन आलू अलग-अलग 11 प्रदेशों में भेजा गया है। व्यापारियों को वहां आलू की कीमत बेहतर मिल रही है। ऐसे में किसानों को मिलने वाली आलू की कीमतों में भी सुधार होने लगा है।
आलू की पैदावार मैनपुरी में बहुतायत में होती है। इस बार भी छह लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू का उत्पादन किया गया है। लेकिन किसानों को कीमतें अच्छी नहीं मिल रही हैं। इसी के चलते शासन और प्रशासन देश के अलग-अलग प्रदेशों में आलू भेजने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। व्याारियों को प्रोत्साहन मिला तो उन्होंने भी इस पर काम किया। इससे आलू की हालत सुधरने लगी है।
जिले में से बीते एक सप्ताह में 11 राज्यों में लगभग 12 हजार मीट्रिक टन आलू 596 ट्रकों में भेजा गया। ये आलू महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, बिहार, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, असोम और आंध्रप्रदेश भेजा गया है।
सबसे बेहतर कीमतें महाराष्ट्र, बिहार और असोम की मंडियों में मिल रही हैं। जिला उद्यान अधिकारी अनूप कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि यहां आठ सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल तक आलू की कीमत मिल रही है। इससे व्यापारियों को मुनाफा हो रहा है। साथ ही वे किसानों से भी छह सौ रुपये से सात सौ रुपये तक प्रति क्विंटल कीमत पर आलू खरीद रहे हैं।
बेवर मंडी से अब तक 70 मीट्रिक टन आलू मध्यप्रदेश और घिरोर मंडी से 1260 मीट्रिक टन आलू महाराष्ट्र की मंडियों में भेजा गया है। बाकी आलू मैनपुरी मंडी से ही भेजा गया है। कुल 12 हजार मीट्रिक टन आलू भेजा गया है, जिसका विक्रय लगभग 4.60 करोड़ रुपये में हुआ है। ऐसे में आलू की कीमतों में सुधार की उम्मीद है।
भाड़ा पर भी दिया जाएगा अनुदान
एक ओर आलू को दूसरे प्रदेशों की मंडियों में भेजने से व्यापारियों और किसानों को कीमत अच्छी मिल रही है तो वहीं विभाग भी उनकी मदद करेगा। इसके लिए विभाग द्वारा भाड़ा पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों या व्यापारियों के ऊपर भाड़े का भी बोझ आधा ही पड़ेगा। इसके लिए जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए आवेदन करना पड़ेगा।
आलू क्रय केंद्र पर नहीं हुई खरीद
शासन ने बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत नवीन मंडी में आलू क्रय केंद्र बीते सोमवार को शुरू किया था। यहां 650 रुपये प्रति क्विंटल कीमत पर आलू की खरीद की जानी थी। लेकिन जिले में आठ दिन का समय बीतने के बाद भी एक आलू नहीं खरीदा जा सका। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब बाजार में ही किसानों को कीमत अधिक मिल रही है तो किसान क्रय केंद्र पर विक्रय क्यों करेंगे।
व्यापारियों की बात
हम तो हमेशा चाहते हैं कि कृषि उपज का अधिक से अधिक दाम मिले। जब अधिक दाम मिलेगा तब ही किसानों को भी फायदा होगा। दूसरे प्रदेशों में आलू की कीमतें अधिक हैं पर और सुधार की जरूरत है।
-अहिरवरन सिंह राजपूत, आलू व्यापारी।
आलू की कीमतें उत्तर प्रदेश के अलावा उन प्रदेशों में अच्छी हैं जहां आलू कम होता है या नहीं होता है। इसके चलते वहीं आलू विक्रय करने के लिए भेजा जा रहा है। किसानों को भी इससे लाभ होगा। - खजान सिंह लोधी, व्यापारी।
दूसरे प्रदेशों में किसानों और व्यापारियों को आलू का दाम अधिक मिल रहा है। जिले से अब तक 12 हजार मीट्रिक टन के करीब आलू भेजा जा चुका है। इसकी कीमतें अच्छी मिली हैं।
-अनूप कुमार चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी।