शहर में एक तरफ कोख में बेटियों का कत्ल करने के कई मामले सामने आ चुके हैं तो दूसरी तरफ खेरागढ़ के मजदूर दंपति ने नजीर पेश की। सात बेटियों में से एक लापता हुई तो उसकी तलाश में गली-मोहल्लों की दौड़ लगा दी। पुलिस से भी मदद के लिए थाने और चौकी के चक्कर लगाए। 12 घंटे बाद बेटी मिली तो दंपति की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। पुलिसकर्मियों से लेकर लोगों को मिठाई बांटी।
खेरागढ़ के गांव कचमई निवासी विजेंद्र और उसकी पत्नी अरतश्री नरायच स्थित श्याम नगर में रिश्तेदार मदन के यहां पर लग्न टीका समारोह में शनिवार शाम को आए थे। उनकी सात बेटियां भी साथ थीं। रविवार सुबह सात बजे लौट रहे थे तभी रास्ते में विजेंद्र की पांचवें नंबर की बेटी सोनम (4) लापता हो गई। इस पर विजेंद्र और उसकी पत्नी ने आसपास के मोहल्लों में तलाश शुरू कर दी। मगर, वह नहीं मिली। पति-पत्नी थक-हारकर शाम को थाने पर पहुंचे। उन्होंने बेटी के गुम होने की जानकारी दी। एक घंटे बाद नरायच की सुनीता पत्नी अशोक बच्ची को लेकर थाने पर आए। उन्होंने बताया कि उन्हें बच्ची रोते हुए मिली थी। उनकी बेटी कमलेश उसे घर ले आई थी। नहलाने के बाद उसे भोजन खिलाया। पूछने पर वह अपने घर के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकी। उसके साथ अनहोनी की आशंका पर थाने लेकर आए थे। बेटी के मिलने पर पति-पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विजेंद्र ने पुलिस कर्मियों को मिठाई का वितरण किया। इसके साथ ही सुनीता को भी मिठाई खिलाई। सुनीता ने सोनम को गोद देने को कहा, लेकिन दंपति ने मना कर दिया। उनका कहना था कि बेटियां भी बेटों से कम नहीं है। वह बेटी को बोझ नहीं समझती। थाने पर उसकी बेटी को गोद लेने आए कई लोगों से उसने यही बात कही।