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चुनावी शोर में दब गया कॉलेजों का नामांकन अभियान

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मैनपुरी। भले ही माध्यमिक शिक्षा परिषद ने एक अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू कर दिया हो, लेकिन इसका असर कॉलेजों में नजर ही नहीं आ रहा है। इस वर्ष भी एक अप्रैल से शुरू हुए शिक्षा सत्र की आवाज चुनावी शोर में दब गई। कॉलेजों से न तो स्कूल चलो रैलियां निकल सकीं और न ही किसी प्रकार की गोष्ठियों का आयोजन हुआ।
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अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन कॉलेजों में शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा है। इस वर्ष उम्मीद की जा रही थी कि अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र में शिक्षा का माहौल बनेगा, लेकिन इस बार भी एक अप्रैल से शुरू हुए सत्र का शुभारंभ चुनावी शोर में दब गया। विभाग ने इस वर्ष तैयारियां की थीं लेकिन शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगने के कारण ये तैयारियां अधूरी ही रह गईं। कॉलेजों में शिक्षा सत्र के 20 दिन बाद भी कक्षा संचालित होने जैसा माहौल नहीं दिख रहा है। सर्वाधिक बुरा हाल तो राजकीय व सहायता प्राप्त कॉलेजों का है। यहां कक्षाएं ही नहीं लग रही हैं। अधिकतर स्कूलों में तो अभी प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है।


नवीन शिक्षा सत्र के तहत दिसंबर तक कोर्स पूरा होना होता है। जिसके लिए कुल नौ महीने मिलते हैं, लेकिन अप्रैल से सत्र शुरू होने के बाद जब कक्षाएं नहीं लगती हैं तो मात्र छह महीने ही बचते हैं। जिसके चलते दिसंबर तक कोर्स पूरा नहीं हो पाता है और परीक्षार्थियों को दिक्कतों का सामना उठाना पड़ता है। जिले में वही पुराने ढर्रे पर शिक्षा व्यवस्था चल रही है।
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