कासगंज। देश और प्रदेश की राजनीति में काफी समय तक काबिज रहने वाली कांग्रेस के लिए दूसरा मौका है जब एटा कासगंज लोकसभा सीट से उनका प्रत्याशी मैदान में नहीं होगा। प्रदेश में कांग्रेस द्वारा जन अधिकार पार्टी से किए गए गठबंधन के चलते यह सीट कांग्रेस के खाते में नहीं है। अब यहां से कांग्रेस और जन अधिकार पार्टी के गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व मंत्री सूरज सिंह शाक्य मैदान में हैं।
देश की आजादी के बाद 1951 में पहले लोकसभा चुनाव में एटा-कासगंज सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की थी। इसके बाद 1957 का चुनाव भी कांग्रेस पार्टी ने जीता। 1962 का चुनाव कांग्रेस का प्रत्याशी हिंदू महासभा के प्रत्याशी से हार गया। इसके बाद पार्टी ने 1967 में इस सीट पर फिर वापसी की। 1971 व 1980 के चुनाव भी पार्टी ने सीट पर जीते। वहीं 1962, 1977, 1984, 1989 के चुनाव में पार्टी दूसरे स्थान पर रही। पार्टी के वोटों के प्रतिशत में लगातार गिरावट आने के बाद भी पार्टी इस सीट पर अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारती रही। 1991, 1996,1998, 1999,एवं 2004 के चुनाव में पार्टी को इस सीट पर चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा, लेकिन पार्टी ने हिम्मत नहीं हारी। 2009 के लोकसभा चुनाव मे भी पार्टी ने अपना प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा। प्रत्याशी एक पायदान नीचे खिसकर पांचवें स्थान पर पहुुंच गया। इसके बाद 2014 में महान दल से गठबंधन के चलते कांग्रेस ने इस सीट पर दावेदारी नहीं की और यहां से महान दल का प्रत्याशी उतरा। हालांकि महान दल और कांग्रेस गठबंधन का प्रत्याशी मिलकर सीट पर कोई खास असर नहीं छोड़ सका और गठबंधन प्रत्याशी को चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा। अब इस बार पार्टी ने जन अधिकार पार्टी से गठबंधन किया है। यह सीटं जनअधिकार पार्टी के खाते में गई है। जन अधिकार पार्टी ने इस सीट पर जनपद की राजनीति में पहचान रखने वाले चार बार सकीट से विधायक रहे सूरज सिंह शाक्य को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। अब यह गठबंधन इस सीट पर क्या गुल खिलाएगा?
गठबंधन के चलते यह सीट जन अधिकार पार्टी के खाते में गई है। पार्टी हाईकमान के फैसले के आधार पर कार्यकर्ता जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाएंगे।
डा. शशिलता चौहान, जिला अध्यक्ष कांग्रेस