मथुरा। लोक निर्माण प्रांतीय खंड द्वारा बनवाए जा रहे न्यायिक अधिकारियों के आवास के गुणवत्ता को लेकर कार्य शुरू होने से पहले ही सवाल खड़े हो गए हैं। आफीसर कॉलोनी स्थित जिन भवनों का पुनर्निर्माण होना है, उनकी निविदा निर्धारित दर से भी 24 प्रतिशत कम आई है। ऐसे में गुणवत्ता परख निर्माण की उम्मीद आखिर कैसे की जा सकती है।
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड को आफीसर कालोनी में जीर्णशीर्ण न्यायिक अधिकारियों के आवास का पुनर्निर्माण करना है। इसके लिए पिछले माह टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन चहेते ठेकेदार को काम देने में नाकाम अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया निरस्त कर दी। इसकी शिकायत हुई तो पुन: टेंडर निकाले गए।
इस बार टेंडर निर्धारित दरों से 24 प्रतिशत तक नीचे आए हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्धारित बजट से 24 प्रतिशत कम राशि के आधार पर न्यायिक अधिकारियों के आवासों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता कैसे संभव हो सकेगी।
ठेकेदारों के साथ अधिकारियों का बड़ा खेल
निर्धारित से कम दरों पर होने वाले निर्माण कार्यों में पीडब्ल्यूडी के अभियंता ठेकेदारों साथ मिलकर बड़ा घालमेल कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत ओल से धर्मपुरा मार्ग पर बनाया गया पुल का अनुबंध करीब 65 लाख रुपये में हुआ था, लेकिन संबंधित ठेकेदार को एक करोड़ तक का भुगतान कर दिया गया है।
निर्धारित कीमत से ऊपर का भुगतान अतिरिक्त मद पैच मरम्मत, मिट्टी, गिट्टी व अन्य कार्य दर्शाकर किया गया है। इस तरह से सरकारी धन को ठिकाने लगाने की प्रक्रिया प्रांतीय खंड में लंबे समय से अभियंता और ठेकेदार मिलकर चला रहे हैं।