एटा। पालिका की बोर्ड बैठक सवालों के घेरे में आ गई है। सोमवार को एक बार फिर मजाक बनी बैठक की शिकायत सीएम से की गई है। साथ ही 11 अप्रैल की बोर्ड बैठक की कार्रवाई की पुष्टि का विरोध किया गया है। बताया जाता है कि एडीएम प्रशासन ने 11 अप्रैल की बैठक को शून्य घोषित किया था।
पालिका बोर्ड बैठक विवादों के घेरे में आ गई है। पालिकाध्यक्ष द्वारा सोमवार को बुलाई गई बैठक में 11 अप्रैल की बोर्ड बैठक की कार्रवाई की पुष्टि की गई। मामले में एडीएम प्रशासन ने बोर्ड बैठक को शून्य मानते हुए जांच आख्या लगाकर शासन को प्रेषित की थी। मगर अब तक शासन में मामला विचाराधीन है। ऐसे में 11 अप्रैल की बैठक की कार्रवाई कर पालिकाध्यक्ष खुद सवालों के घेरे में हैं।
सवाल है कि पालिकाध्यक्ष शासन में विचाराधीन बोर्ड बैठक की कार्रवाई कैसे करा सकती हैं? साथ ही सफाई निरीक्षक को वित्तीय अधिकार नहीं है, तो कैसे बजट को लेकर चर्चा की जा सकती है? इसके अलावा प्रतिनिधियों की मौजूदगी पर पालिकाध्यक्ष ने आपत्ति क्यों नहीं जताई? मंगलवार को बोर्ड बैठक को लेकर शहर भर में चर्चा का आलम रहा।
------------
तो क्या गलत है अधिकारियों की जांच
पालिकाध्यक्ष 11 अप्रैल की बोर्ड बैठक को पारित मान रहे हैं। उनका कहना है कि मिनट बुक से छेड़छाड़ वाला भाग हटाकर बोर्ड बैठक को पारित कर दिया गया था। ऐसे में सवाल है कि फिर अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट में बैठक को शून्य क्यों घोषित किया था। तो मान लिया जाए कि कमिश्नर, तत्कालीन डीएम, एडीएम प्रशासन और जांच टीम में शामिल एडीएम वित्त एवं राजस्व समेत चारों अधिकारियों की जांच रिपोर्ट गलत है या फिर पालिकाध्यक्ष मामले से बचने को गलत बयान दे रही हैं।
------------
पालिका में तीन बोर्ड बैठकें हो चुकी हैं। लोग गलत भ्रम फैलाकर शहर के विकास में बाधक बन रहे हैं। 11 अप्रैल की बैठक को मान्य माना गया है। सिर्फ मिनट बुक मेें छेड़छाड़ वाले भाग को लेकर आपत्ति जताई गई है। उसी को लेकर नोटिस मिला था। जिसका हमने जवाब दे दिया है।
राकेश गांधी, पूर्व अध्यक्ष और पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि
शिकायत के बाद जांच कर हमने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। अब शासन को निर्णय लेना है। अभी हमारे पास बोर्ड की हुई बैठक की कोई कार्यवाही नहीं आई है। इसमें विधिक राय लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
धर्मेन्द्र सिंह, एडीएम प्रशासन