फिरोजाबाद। शहर की पुरानी आबादी में तिलक भवन है। संकरी सी गली में बने इस भवन में संचालित स्कूल में अब बच्चों की किलकारी गूंजती है, लेकिन कभी यहां पर आजादी के तराने गूंजा करते थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह भवन देशभक्तों का प्रमुख केंद्र था। जहां पर क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकें होती थीं। स्वतंत्रता के योद्धाओं के बीच में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी यहीं से होता था।
सदर बाजार से बोहरान गली में अंदर चलने पर बायीं ओर वाली गली में स्थित तिलक भवन की स्थापना लोकमान्य तिलक की स्मृति में 1911 में हुई थी। यहां कांग्रेस कार्यालय था और स्वयंसेवकों की छावनी भी यहीं थी। आजादी का आंदोलन यहीं से संचालित होते थे। गुप्त बैठकों में रणनीति तैयार होती थी। आजादी के आंदोलन से जुड़े पत्रक व अन्य सामग्री के वितरण की योजना भी यहीं बनाई जाती थी।
गली-गली में आजादी की लड़ाई का संदेश पहुंचाने वाले बाल भारत सभा के स्वयंसेवक भी यहीं एकत्रित होते थे। कुछ समय बाद इस भवन की जानकारी अंग्रेजी हुकूमत हो गई और यहां की गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी, लेकिन तंग गलियों में होते हुए क्रांतिकारियों का यहां पहुंचना जारी रहा। क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए कई बार छापे मारे गए, लेकिन हर बार वे भवन में बनाए गए गुप्त रास्तों से बचकर निकल जाते थे।
यहां बने पुस्तकालय में प्रतिबंधित किताबें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को पढ़ने दी जाती थीं। तिलक भवन में अंदर से पुस्तकालय में जाने का एक रास्ता था। पुस्तकालय के नीचे एक गुप्त कमरा था, जो क्रांतिकारियों का केंद्र हुआ करता था। भारत में अंग्रेजी राज्य, टाट का राजस्थान, लोकमान्य तिलक जैसी पुस्तकें यहां पर क्रांतिकारी पढ़ते थे। पुलिस के छापे के दौरान इन पुस्तकों को बचाने के लिए अलमारियों के पीछे बने गुप्त स्थानों पर छिपाया जाता था।
रामचंद्र पालीवाल स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में प्रमुख थे। वह खादी पहनकर और तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाते हुए चलते थे। वरिष्ठ अधिवक्ता अनूपचंद्र जैन एडवोकेट ने बताया कि रामचंद्र पालीवाल ने फिरोजाबाद तहसील के लोगों को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संगठित किया। महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस की सभाओं में वह मुख्यवक्ता के रूप में शामिल होते थे। पालीवाल विधानसभा के लिए भी चुने गए। वह महज 496 रुपये के खर्च पर चुनाव जीते थे। उन्हीं के नाम से पालीवाल हाल का निर्माण कराया गया।