टूंडला। रविवार को एक गंभीर हादसा हो गया। रेलवे प्रशासन द्वारा ध्वस्त कराई जा रही जर्जर हो चुकी इमारत के गिर जाने से दो मजदूर दब गए। घायलों को गंभीर हालत में आगरा रेफर किया गया है। ध्वस्तीकरण के दौरान ठेकेदार की लापरवाही देखने को मिली। मजदूरों को सुरक्षा उपकरण प्रदान नहीं किए गए थे।
रेलवे प्रशासन द्वारा अपनी जर्जर हो चुकी इमारतों, आवासों को तुड़वाया जा रहा है। इसी क्रम में रेलवे परिसर में संचार विभाग की काफी समय से जर्जर इमारत को ध्वस्त करने के लिए मजदूर लगाए गए थे। सुबह करीब 11 बजे इमारत ध्वस्त करने के दौरान अचानक इमारत का जर्जर छज्जा भरभरा कर नीचे आ गिरा। जिसमें काम कर रहे मजदूर वीरेंद्र पुत्र दीना निवासी सियोट सीपरी झांसी और देवी सिंह पुत्र रामचरन निवासी शिवपुरी मध्यप्रदेश गंभीर रूप से घायल हो गए। इमारत के गिरते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
मजदूरों के मलबे में दबे होने की जानकारी पर डीटीएम समर्थ गुप्ता तत्काल मौके पर पहुंच गए। उन्होंने अन्य कर्मचारियों की मदद से दोनों मजदूरों को मलबे से बाहर निकलवाया। जानकारी होने पर डिप्टी सीएसटी विजय मालवीय, एएसी योगेंद्र राय समेत अन्य रेल अधिकारी व कर्मचारी मौके पर आ गए। डीटीएम ने निजी वाहन से दोनों घायलों को रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर दोनों को आगरा के एसएन मेडिकल कालेज में भर्ती करा दिया गया। जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
वर्ष 200 में रेलवे की लोको शेड को गिराने के दौरान भी घोर लापरवाही सामने आई थी। इस शेड को गिराने के दौरान शेड भरभरा कर गिर गया था। जिसमें मौके पर ही 25 मजदूरों ने दम तोड़ दिया था। जिसको लेकर काफी हंगामा हुआ था। बावजूद इसके रेलवे प्रशासन ने अभी तक उक्त घटना से कोई सबक नहीं लिया है।