मथुरा। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पत्नी पर चरित्रहीनता का आरोप लगाकर उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में बदायूं के तहसीलदार एबरन सिंह को दस साल का कारावास और 35 हजार का जुर्माना लगाया है। बाद में उसे कोर्ट से जेल भेज दिया गया।
मृतका के पिता ने 14 नवंबर 2001 को छाता कोतवाली में तहरीर दी थी कि उसने बेटी अर्चना की शादी 21 नवंबर 1996 को एबरन सिंह निवासी थाना करहल मैनपुरी से की थी। शादी में क्षमता के अनुसार दहेज भी दिया। लेकिन अर्चना की ननद व ससुरालीजन उससे दहेज की मांग करते तथा उसे मारापीटा करते थे। 14 नवंबर 2001 को एबरन ने फोन किया कि आपकी बेटी जल गई है। मौके पर तत्कालीन एसडीएम छाता ने मृत्यु पूर्व बयान लिए। उसमें अर्चना ने दहेज की बात से इंकार करते हुए मारपीट किए जाने की बात कही।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रवीन कुमार सिंह ने बताया ट्रायल के दौरान एक बात और सामने आई कि एबरन सिंह अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था। कोर्ट में दोनों पक्षों ने गवाह और सबूत पेश किए। अदालत में एबरन सिंह पर पत्नी को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की बात सिद्ध हो गई।
इस पर न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने शुक्रवार को एबरन सिंह को 10 साल का कारावास, 35 हजार का जुर्माना लगाया है। वर्तमान में एबरन सिंह बदायूं में तहसीलदार है। उसे जेल भेज दिया गया है। एबरन सिंह 17 साल पहले मथुरा जनपद की छाता तहसील में तहसीलदार रहे थे।