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हुरियारिनों की लाठी, हुरियारों की ढाल देख योगी होंगे निहाल

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डेमो - फोटो : डेमो
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बरसाना (मथुरा)। महाशिवरात्रि पर्व पर प्रथम चौपाई निकलने के बाद बरसाना में होली की मस्ती बढ़ने लगी है। हुरियारिनें अपनी लाठियों को तेल पिला रही हैं। हुरियारे भी अपनी ढालों को तेल पिलाकर सजाने लगे हैं।
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बरसाना की लठामार होली विश्व विख्यात ऐसे ही नहीं है। इसमें हुरियारिनें बिना रुके-थके एक घंटे तक ताबड़तोड़ लट्ठ ढालों के ऊपर बरसाती हैं। उनके लाठी चलाने का अंदाज किसी लठैत से कम नहीं होता। इसके लिए हुरियारिनों में सबसे बुजुर्ग हुरियारिन अपनी बहुओं को महाशिवरात्रि के बाद से लट्ठ चलाने के गुण सिखाती हैं। जिसका अभ्यास नई नवेली हुरियारिन करती हैं।

वहीं नंदगांव से आए हुरियारे भी अपने नन्हे हुरियारों को लाठियों से बचने के तरीके ढाल पर सिखा रहे हैं। अपनी 52वीं होली खेलने के लिए तैयार जमुना देवी बताती हैं कि हम बहुओं को ढाल को निशाना बनाकर लाठी चलाना सिखाते हैं। उन्हें यह भी बताते हैं कि हमारी लाठी से हुरियारों को किसी भी तरह की चोट न लग पाए, क्योंकि वह हुरियारे हमारी श्रीजी के प्रिय होते हैं।
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शीला श्रोत्रिय बताती हैं कि हमें विश्वास नहीं होता कि हम लठामार होली वाले दिन घंटों लाठियां बरसाती हैं। यह सब वृषभानु नंदिनीं की कृपा से ही संभव हो पाता है। हम बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हमारी ससुराल राधारानी का गांव बरसाना है।

दूध, बादाम हलवा और फलों का कर रही हैं सेवन
लठामार होली के दौरान चारों तरफ श्रद्धालुओं का हुजूम और चमड़े की ढाल पर लाठियां पड़ते ही लाठी पीछे की तरफ आती है। इससे निपटने के लिए हुरियारिनों के हाथ की पकड़ का मजबूत होना आवश्यक होता है।

इसके लिए हुरियारिनें एक महीने पहले से ही सुबह और शाम दूध में बादाम डाल कर तो कभी हलवा बनाकर खा रही हैं। फलों का सेवन करती हैं। इन सभी पौष्टिक आहार को खाने के बाद लगातार लाठी चलाने की ताकत उन्हें मिलती है।
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